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टीएमसी ने दलबदलू सांसदों की अयोग्यता की मांग की, स्पीकर को सौंपी 20 याचिकाएं

मुख्य तथ्य टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और 20 दलबदलू सांसदों की अयोग्यता की मांग करते हुए याचिकाएं सौंपीं।…

मुख्य तथ्य

टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और 20 दलबदलू सांसदों की अयोग्यता की मांग करते हुए याचिकाएं सौंपीं। बनर्जी ने कहा कि विद्रोही सांसदों ने अपना 'विवेक' बेच दिया है और उन्हें पहले इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ना चाहिए।

विस्तार से

अभिषेक बनर्जी के साथ सौगत रॉय और डेरेक ओ'ब्रायन भी थे। उन्होंने कहा, 'हमने अपना मामला स्पीकर के सामने रखा है। यदि वे संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार कार्य करते हैं, तो इन सांसदों को अयोग्य ठहराया जाना चाहिए।' बनर्जी ने उम्मीद जताई कि स्पीकर संविधान के अनुसार निष्पक्ष निर्णय देंगे।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में सांसदों के एक समूह ने पिछले सप्ताह स्पीकर से संपर्क किया था, जिसमें दावा किया गया था कि वे त्रिपुरा स्थित एक राजनीतिक दल में शामिल हो गए हैं और लोकसभा में एक अलग गुट के रूप में कार्य करना चाहते हैं।

टीएमसी का तर्क

अभिषेक बनर्जी ने कहा, 'यदि आप एक चुनाव चिन्ह पर चुने गए और दो साल बाद दावा कर रहे हैं कि आप दूसरी पार्टी में शामिल हो रहे हैं, तो आपकी लोकसभा सदस्यता समाप्त होनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि यदि वे विलय का दावा करते हैं, तो संविधान की 10वीं अनुसूची के बिंदु 4 के अनुसार, विलय तब माना जाता है जब किसी राजनीतिक दल के दो-तिहाई सदस्य विलय करें, न कि केवल विधायी दल के।

बनर्जी ने कहा, 'उन्होंने अपना विवेक बेच दिया है और बंगाल के लोग उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। उनमें से कुछ को केंद्रीय सुरक्षा मिली है। मैं कहता हूं कि वे बंगाल जाएं और लोगों का सामना करें।' उन्होंने आरोप लगाया कि ये सांसद ईडी, सीबीआई से बचना चाहते हैं या धमकी दी जा रही है या पैसे दिए जा रहे हैं।

दलबदलू सांसदों का पक्ष

काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले 20 दलबदलू सांसदों का मानना है कि वे अयोग्य नहीं होंगे क्योंकि पार्टी के 28 में से 20 सांसदों ने दूसरी पार्टी में विलय कर लिया है। हालांकि, ममता बनर्जी गुट का तर्क है कि दलबदल कानून के तहत यह स्थापित करने के लिए व्यापक 'ट्विन टेस्ट' की आवश्यकता है कि मूल राजनीतिक दल का वैध विलय हुआ है या नहीं।

आगे की कार्यवाही

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि टीएमसी ने स्पीकर के 'निर्णय और विवेक' पर छोड़ दिया है। स्पीकर ने कहा है कि वे दूसरे पक्ष की बात सुनेंगे और फिर से बुलाएंगे। टीएमसी को उम्मीद है कि वे संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कार्य करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी ने कितने दलबदलू सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की?

टीएमसी ने 20 दलबदलू सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की है।

दलबदलू सांसदों का तर्क क्या है?

दलबदलू सांसदों का कहना है कि चूंकि 28 में से 20 सांसदों ने दूसरी पार्टी में विलय किया है, इसलिए वे अयोग्य नहीं होंगे।

टीएमसी का दलबदल कानून पर क्या रुख है?

टीएमसी का कहना है कि दलबदल कानून के तहत वैध विलय के लिए व्यापक 'ट्विन टेस्ट' की आवश्यकता है, जो पूरा नहीं हुआ है।

स्रोत: indianexpress.com

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