मुख्य तथ्य
एक ऐतिहासिक अध्ययन में पाया गया है कि इंग्लैंड में HPV वैक्सीन लेने वाली युवा महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर से मृत्यु दर शून्य हो गई है। The Lancet में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, 2020-2024 के बीच 20-24 वर्ष की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर से एक भी मौत नहीं हुई, जबकि पिछले रुझानों के आधार पर 23 मौतों की उम्मीद थी।
विस्तार से जानकारी
इंग्लैंड ने 2008 में 12-13 वर्ष की लड़कियों के लिए HPV टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया था। बाद में इसे लड़कों तक भी बढ़ाया गया। इस वैक्सीन ने ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के खिलाफ सुरक्षा प्रदान की, जो सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। अध्ययन में 20-24 वर्ष की आयु वर्ग में शून्य मृत्यु दर को 'उन्मूलन की दिशा में मील का पत्थर' बताया गया है।
भारत पर प्रभाव
भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिससे हर साल लगभग 60,000 महिलाओं की मौत होती है। इंग्लैंड की सफलता भारत के लिए एक मजबूत सबक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत में भी व्यापक HPV टीकाकरण कार्यक्रम लागू किया जाए, तो दशकों में सर्वाइकल कैंसर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पाठकों को क्या जानना चाहिए
- टीकाकरण की उम्र: HPV वैक्सीन 9-14 वर्ष की लड़कियों और लड़कों को लगाने की सिफारिश की जाती है।
- सुरक्षा: वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर के 70% से अधिक मामलों को रोक सकती है।
- भारत में उपलब्धता: वैक्सीन निजी क्षेत्र में उपलब्ध है, लेकिन सरकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं है।
- जागरूकता: स्क्रीनिंग और टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
FAQ
क्या इंग्लैंड में सर्वाइकल कैंसर से मौतें पूरी तरह खत्म हो गई हैं?
हां, 20-24 वर्ष की महिलाओं में 2020-2024 के दौरान सर्वाइकल कैंसर से एक भी मौत दर्ज नहीं हुई, जबकि पहले 23 मौतों की उम्मीद थी।
यह सफलता कैसे मिली?
इंग्लैंड में 2008 से किशोरियों को HPV वैक्सीन लगाई जा रही है, जिससे वायरस के संक्रमण और कैंसर के विकास को रोका गया।
भारत के लिए इसका क्या महत्व है?
भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। इंग्लैंड का अनुभव बताता है कि व्यापक टीकाकरण से इसे खत्म किया जा सकता है।
भारत में HPV टीकाकरण की स्थिति क्या है?
भारत में HPV वैक्सीन उपलब्ध है लेकिन राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल नहीं है। जागरूकता और पहुंच बढ़ाने की जरूरत है।