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अमित शाह: तीन साल में fir से सजा तक पूरी होगी प्रक्रिया, ai से मजबूत होगा आपराधिक न्याय तंत्र

मुख्य बातें गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि FIR से सजा तक की प्रक्रिया तीन साल में पूरी करने का लक्ष्य है। तकनीक, AI और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच पर जोर दिया गया।…

मुख्य बातें

  • गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि FIR से सजा तक की प्रक्रिया तीन साल में पूरी करने का लक्ष्य है।
  • तकनीक, AI और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच पर जोर दिया गया।
  • NCRB द्वारा विकसित चार नए एप्लिकेशन लॉन्च किए गए।
  • NAFIS डेटाबेस में 1.29 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड हैं।
  • CCTNS सभी 17,840 पुलिस स्टेशनों पर लागू हो चुका है।

विस्तार से जानकारी

नई दिल्ली में 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार आपराधिक न्याय प्रक्रिया को तीन साल के भीतर पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और वैज्ञानिक साक्ष्यों का उपयोग अपराध जांच में बढ़ाया जाएगा।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने 2019 से आपराधिक कानूनों में व्यापक सुधार किए हैं, जिसका उद्देश्य विज्ञान और तकनीक को आपराधिक न्याय प्रणाली का अभिन्न अंग बनाना है।

नए एप्लिकेशन लॉन्च

गृह मंत्री ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा विकसित चार नए एप्लिकेशन — NCRB-अभिज्ञान, CrPI, e-Prosecution 2.0 और e-Forensics 2.0 — लॉन्च किए। उन्होंने कहा कि ये एप्लिकेशन लंबित मामलों के त्वरित निपटान और समय पर न्याय सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।

तीन साल का लक्ष्य

शाह ने कहा कि FIR दर्ज होने से लेकर सजा तक तीन साल में न्याय सुनिश्चित करना सरकार के आपराधिक न्याय सुधारों का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने दावा किया कि पिछले सात वर्षों में भारत इस लक्ष्य को प्राप्त करने के करीब पहुंच गया है।

वैज्ञानिक जांच पर जोर

गृह मंत्री ने वैज्ञानिक जांच के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि फिंगरप्रिंट सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों में से एक हैं। उन्होंने राज्यों से राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) डेटाबेस को लगातार मजबूत करने का आग्रह किया, जिसमें अपराध स्थलों से एकत्रित फिंगरप्रिंट अपलोड किए जाएं।

“चाहे अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो, वह कानून और विज्ञान की संयुक्त शक्ति से बच नहीं सकता।” — अमित शाह

उन्होंने कहा कि सरकार पारंपरिक बल-आधारित पुलिसिंग मॉडल से हटकर वैज्ञानिक साक्ष्य-आधारित जांच और अपराध नियंत्रण की ओर बढ़ रही है।

प्रेडिक्टिव पुलिसिंग फ्रेमवर्क

शाह ने एक प्रेडिक्टिव पुलिसिंग फ्रेमवर्क की योजना की भी घोषणा की, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और पैटर्न एनालिसिस का उपयोग करके अपराध होने से पहले ही बार-बार अपराध करने वालों और अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क की पहचान करेगा।

डेटाबेस और डिजिटल रिकॉर्ड

शाह के अनुसार, 1.29 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, लगभग 10 लाख नशीली दवाओं के अपराधियों के रिकॉर्ड और 3.65 लाख मानव तस्करी के रिकॉर्ड वाले डेटाबेस को उन्नत विश्लेषण के माध्यम से कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी में बदला जाएगा।

उन्होंने बताया कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) अब देश के सभी 17,840 पुलिस स्टेशनों पर लागू हो चुका है और इसमें 37.68 करोड़ डिजिटल रिकॉर्ड हैं।

अदालतों के साथ सहयोग

सरकार मामलों की लंबितता कम करने के लिए उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के साथ मिलकर एक खाका तैयार कर रही है। शाह ने कहा कि शाम की अदालतें स्थापित करने और उच्च न्यायालयों में लंबित आपराधिक मामलों को निपटाने के लिए तंत्र विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्यों से आग्रह

गृह मंत्री ने राज्यों से आग्रह किया कि वे अपराध पैटर्न और अपराधी प्रोफाइल का विश्लेषण करने के लिए AI और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करने वाली विशेष टीमें बनाएं। साथ ही, उन्होंने आपराधिक डेटाबेस की सुरक्षा के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों, जवाबदेही तंत्र और नियमित ऑडिट की आवश्यकता पर बल दिया।

FAQ

सरकार का तीन साल में न्याय प्रक्रिया पूरी करने का क्या मतलब है?

गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, FIR दर्ज होने से लेकर अदालत में सजा और अपील तक की पूरी प्रक्रिया तीन साल के भीतर पूरी करने का लक्ष्य है।

NAFIS डेटाबेस में कितने फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड हैं?

नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) में 1.29 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड हैं।

CCTNS का पूरा नाम क्या है और इसका क्या लाभ है?

CCTNS का पूरा नाम क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स है। यह देश के सभी 17,840 पुलिस स्टेशनों को जोड़ता है और इसमें 37.68 करोड़ डिजिटल रिकॉर्ड हैं, जिससे अपराधियों पर नज़र रखना आसान होता है।

प्रेडिक्टिव पुलिसिंग फ्रेमवर्क क्या है?

यह एक ऐसा ढांचा है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और पैटर्न एनालिसिस का उपयोग करके अपराध होने से पहले ही बार-बार अपराध करने वालों और अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क की पहचान करेगा।

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