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Sc ने अंधे व्यक्ति और उसकी बुजुर्ग मां को दिया बड़ा सहारा, ओडिशा सरकार को सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने उठाया संज्ञान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओडिशा के सुबर्णपुर जिले के बगाड़िया गांव में रहने वाली 80 वर्षीय राधिका भूए और उनके 56 वर्षीय अंधे बेटे जपा भूए की दयनीय स्थिति…

सुप्रीम कोर्ट ने उठाया संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओडिशा के सुबर्णपुर जिले के बगाड़िया गांव में रहने वाली 80 वर्षीय राधिका भूए और उनके 56 वर्षीय अंधे बेटे जपा भूए की दयनीय स्थिति का स्वतः संज्ञान लिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा, 'यहां एक व्यक्ति है जो दुर्भाग्य से अंधा है और उसकी 80 वर्षीय मां है, जिनके पास कोई आवास नहीं है... हम उनके भरण-पोषण और सम्मानजनक जीवन के लिए चिंतित हैं, जिसके वे हकदार हैं।'

सरकार को सख्त निर्देश

पीठ ने ओडिशा सरकार को निर्देश दिया कि वह राधिका भूए और जपा भूए को मिलने वाले मासिक वेतन, आवास और अन्य केंद्रीय या राज्य योजनाओं के लाभों का ब्योरा पेश करे। कोर्ट ने पूछा कि क्या मां को वृद्धावस्था पेंशन और बेटे को विकलांगता पेंशन मिल रही है।

राज्य सरकार का जवाब

ओडिशा सरकार ने अदालत को बताया कि दोनों को संबंधित मदों के तहत 3500 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मां और उसके दो बेटों को आवास आवंटित किया गया है। साथ ही, उन्हें हर महीने मुफ्त खाद्यान्न भी मिल रहा है।

मीडिया रिपोर्टों का हवाला

अदालत ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह परिवार एक जर्जर झोपड़ी में रह रहा है और मामूली पेंशन और खाद्यान्न के कारण सभ्य जीवन जीने में असमर्थ है। कोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में इन लाभों का विवरण मांगा।

रोजगार और चिकित्सा सहायता के आदेश

पीठ ने ओडिशा विधिक सेवा प्राधिकरण (OLSA) के सदस्य सचिव को निर्देश दिया कि जपा भूए को पैरा-लीगल वॉलंटियर के रूप में नियुक्त किया जाए, ताकि वह विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों को संवेदनशील बना सके। कोर्ट ने कहा कि उन्हें न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत निर्धारित राशि से कम का मानदेय नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, OLSA को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और नजदीकी जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के साथ समन्वय करके तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया।

आवास की जांच के आदेश

अदालत ने कहा, 'प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि जपा भूए एक अलग आवास इकाई के हकदार हैं।' OLSA को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत इस पहलू की जांच करने और यदि पात्रता हो तो राज्य सरकार से मामला उठाने का निर्देश दिया गया।

अगली सुनवाई जुलाई में

फिलहाल, पीठ ने दोनों व्यक्तियों को सभी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का आदेश दिया और मामले को जुलाई में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अगली तारीख पर, अदालत राज्य सरकार के हलफनामे पर विचार करेगी, जिसमें अब तक दिए गए लाभों और बकाया राशि का ब्योरा होगा।

पृष्ठभूमि

जपा भूए जन्म से अंधे हैं और पिता की हाल ही में हुई मौत के बाद वे अपनी बुजुर्ग मां पर निर्भर हो गए। आर्थिक तंगी के कारण परिवार को बेहद खराब हालात में जीवन गुजारना पड़ रहा था, कई दिनों तक भोजन भी नसीब नहीं होता था और वे पड़ोसियों से मदद मांगते थे।

FAQ

सुप्रीम कोर्ट ने जपा भूए और उनकी मां के लिए क्या आदेश दिए?

कोर्ट ने ओडिशा सरकार को सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, साथ ही जपा भूए को पैरा-लीगल वॉलंटियर के रूप में नियुक्त करने का आदेश दिया।

जपा भूए और उनकी मां को वर्तमान में क्या लाभ मिल रहे हैं?

ओडिशा सरकार ने बताया कि दोनों को 3500 रुपये प्रति माह पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास, और मुफ्त खाद्यान्न मिल रहा है।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?

कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि यह मां-बेटा जर्जर झोपड़ी में रह रहे हैं और उनकी हालत बेहद खराब है।

अगली सुनवाई कब होगी?

मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी, जिसमें राज्य सरकार हलफनामा पेश करेगी।

Source: www.hindustantimes.com

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