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केरल हाईकोर्ट में महिलाओं-ट्रांसजेंडरों के लिए मुफ्त बस योजना को चुनौती

प्रमुख तथ्य केरल उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 15 जून 2026 को शुरू की गई ‘प्रियदर्शिनी’ मुफ्त बस यात्रा योजना को चुनौती दी गई है।…

प्रमुख तथ्य

केरल उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 15 जून 2026 को शुरू की गई 'प्रियदर्शिनी' मुफ्त बस यात्रा योजना को चुनौती दी गई है। यह योजना केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की साधारण बसों में महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को मुफ्त यात्रा प्रदान करती है।

याचिका में उठाए गए मुद्दे

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह योजना संविधान में परिकल्पित समानता के अधिकार और भेदभाव के विरुद्ध अधिकार का उल्लंघन करती है। इसमें कहा गया है कि योजना में कोई आय मानदंड या निवास योग्यता नहीं है, और यह किसी विशिष्ट नुकसान का समाधान नहीं करती है। इसके अलावा, इससे सार्वजनिक खजाने पर प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ रुपये या वार्षिक 800 करोड़ रुपये का बोझ पड़ता है।

याचिका की मांगें

याचिका में मांग की गई है कि योजना को असंवैधानिक घोषित किया जाए, या वैकल्पिक रूप से राज्य को योजना पर पुनर्विचार करने के लिए एक व्यापक वित्तीय और सामाजिक प्रभाव आकलन करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, अदालत से राज्य को योजना के लिए अनुमानित वार्षिक वित्तीय देयता, धन के स्रोत और KSRTC पर इसके अनुमानित प्रभाव का खुलासा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

योजना का प्रभाव और आगे की कार्यवाही

यह योजना केरल सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों का हिस्सा है, लेकिन इसकी वित्तीय व्यवहार्यता और संवैधानिकता पर सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना होगा कि केरल उच्च न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

FAQ

Priyadarshini योजना क्या है?

यह केरल सरकार द्वारा 15 जून 2026 को शुरू की गई योजना है, जिसमें महिलाओं और ट्रांसजेंडरों को KSRTC की साधारण बसों में मुफ्त यात्रा दी जाती है।

PIL में क्या आपत्ति जताई गई है?

PIL में कहा गया है कि यह योजना समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है, इसमें कोई आय मानदंड या निवास योग्यता नहीं है, और इससे सरकारी खजाने पर प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ रुपये का बोझ पड़ता है।

याचिका में क्या मांग की गई है?

याचिका में योजना को असंवैधानिक घोषित करने या वैकल्पिक रूप से राज्य को वित्तीय और सामाजिक प्रभाव आकलन करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

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