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तमिलनाडु की राजनीति में धर्मनिरपेक्षता की मजबूत जड़ें: विजय के सीएम बनने के बाद एक विश्लेषण

परिचय तमिलनाडु में हाल ही में अभिनेता और तमिलगा वेट्ट्री कड़गम (TVK) के संस्थापक सी. जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद संभाला। यह घटना राज्य की राजनीति में धर्मनिरपेक्षता की मजबूत जड़ों को उजागर करती है।…

परिचय

तमिलनाडु में हाल ही में अभिनेता और तमिलगा वेट्ट्री कड़गम (TVK) के संस्थापक सी. जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद संभाला। यह घटना राज्य की राजनीति में धर्मनिरपेक्षता की मजबूत जड़ों को उजागर करती है। तमिलनाडु के मतदाताओं ने हमेशा धर्म और जाति से परे देखकर अपने नेताओं का चयन किया है। यह लेख इस अनोखी राजनीतिक संस्कृति के कारणों का विश्लेषण करता है।

मुख्य तथ्य

  • तमिलनाडु की जनसंख्या में 88% हिंदू, 6% ईसाई और 6% मुस्लिम हैं।
  • राज्य ने विभिन्न धर्मों और जातियों के नेताओं को बिना किसी विवाद के चुना है, जैसे एम.जी. रामचंद्रन (नायर), जयललिता (तमिल ब्राह्मण), और अब विजय (तमिल ईसाई)।
  • द्रविड़ आंदोलन ने 1920 के दशक से सामाजिक सुधारों की नींव रखी।

द्रविड़ आंदोलन का प्रभाव

द्रविड़ आंदोलन की शुरुआत 1916 में जस्टिस पार्टी से हुई, जिसने गैर-ब्राह्मणों के लिए आरक्षण की मांग की। ई.वी. रामासामी (पेरियार) के नेतृत्व में 'स्वाभिमान आंदोलन' ने जातिगत उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई। बाद में 1949 में डीएमके का गठन हुआ, जिसने पेरियार के कट्टर विचारों से दूरी बनाई और सत्ता में आया।

सामाजिक सुधार और शिक्षा

के. कामराज के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने मुफ्त शिक्षा पर जोर दिया। करुणानिधि ने दलित समुदाय के लिए समतुवा पुरम (समानता गांव) बनाए। एम.जी.आर. की मिड-डे मील योजना ने लड़कियों की शिक्षा में वृद्धि की।

आर्थिक विकास और महिला सशक्तिकरण

1990 के दशक से, जयललिता और करुणानिधि की सरकारों ने विनिर्माण में एफडीआई को आकर्षित किया। तमिलनाडु में शहरी जनसंख्या लगभग 50% है, जो आर्थिक विकास को गति देती है। भारत की 42% महिला कारखाना श्रमिक तमिलनाडु से हैं, जो सामाजिक सुधारों की सफलता को दर्शाता है।

फिल्म उद्योग की भूमिका

तमिल फिल्म उद्योग ने धर्म और जाति से परे प्रतिभा को पुरस्कृत किया है। एम.जी.आर., जयललिता, करुणानिधि और अब विजय ने फिल्मों से राजनीति में प्रवेश किया। करुणानिधि ने 2010 में तंजावुर बृहदेश्वर मंदिर के 1000वें वर्ष का आयोजन करके दिखाया कि एक नास्तिक शासक भी धार्मिक आस्था का सम्मान कर सकता है।

FAQ

तमिलनाडु में धर्म और जाति के आधार पर मतदान क्यों नहीं होता?

द्रविड़ आंदोलन, सामाजिक सुधारों और धर्मनिरपेक्ष फिल्म उद्योग के कारण तमिलनाडु के मतदाता धर्म और जाति से परे देखते हैं।

तमिलनाडु में फिल्म उद्योग का राजनीति पर क्या प्रभाव है?

फिल्म उद्योग ने योग्यता को प्राथमिकता दी है और कई अभिनेता-नेता दिए हैं, जिससे राजनीति में धर्मनिरपेक्षता बढ़ी है।

क्या तमिलनाडु का मॉडल अन्य राज्यों में लागू किया जा सकता है?

तमिलनाडु का मॉडल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारणों से अनूठा है, इसलिए इसे आसानी से दोहराया नहीं जा सकता।

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