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लाहौल-स्पिति जिले में बाढ़ की चेतावनी प्रणाली की एनडीएमए ने की समीक्षा

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्थित घेपन झील के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा बाढ़ चेतावनी प्रणाली की समीक्षा की गई है। एनडीएमए के सदस्य डॉ दिनेश कुमार अस्वल और सचिव मनीष…

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्थित घेपन झील के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा बाढ़ चेतावनी प्रणाली की समीक्षा की गई है। एनडीएमए के सदस्य डॉ दिनेश कुमार अस्वल और सचिव मनीष भारद्वाज ने 15 से 17 अप्रैल तक सिस्सू झील के निकट स्थित साइट का निरीक्षण किया और प्रस्तावित प्रणाली की तकनीकी पहलुओं का मूल्यांकन किया।

बाढ़ चेतावनी प्रणाली का उद्देश्य

डॉ अस्वल ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना और इसके तकनीकी ढांचे को समझना था। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में, विशेष रूप से लाहौल-स्पीति जैसे नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में, ग्लेशियर झीलों के फटने से होने वाली अचानक बाढ़ एक गंभीर खतरा है। घेपन झील के लिए प्रस्तावित प्रणाली बाढ़ की संभावना के先े चेतावनी जारी करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे जीवन और संपत्ति को होने वाली क्षति को कम किया जा सके।

प्रणाली का मूल्यांकन

एनडीएमए अधिकारियों ने तकनीकी टीमों के साथ प्रदर्शन और ज्ञान साझा करने वाले सत्रों के माध्यम से प्रणाली के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया। मनाली में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। अधिकारियों को तकनीकी एजेंसियों के साथ密 समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया ताकि प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके।

जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम

डॉ अस्वल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से ग्लेशियर वृद्धि - जो हिमालय में 1 मिमी से 17 मिमी प्रति वर्ष अनुमानित है - आपदा जोखिम को बढ़ा रहे हैं, जिससे ऐसे तकनीकी हस्तक्षेप आवश्यक हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अव्यवस्थित विकास और पारिस्थितिक संतुलन को बाधित करने वाली गतिविधियां लंबी अवधि की पर्यावरणीय चुनौतियों को बढ़ा रही हैं। उन्होंने सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें सरकारी एजेंसियों, मीडिया, नागरिक समाज और सार्वजनिक भागीदारी शामिल है, जिसमें वनस्पति जैसी पहल शामिल हैं, ताकि आपदा जोखिमों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

एनडीएमए टीम ने ब्यास नदी के किनारे बाढ़ सुरक्षा उपायों की भी समीक्षा की, जहां पानी के स्तर में वृद्धि के कारण हाल के वर्षों में क्षति हुई है। जल शक्ति विभाग द्वारा बाढ़ प्रबंधन योजनाओं पर एक विस्तृत प्रस्तुति की गई। अधिकारियों ने कहा कि राज्य में आपदा प्रबंधन योजना में काफी सुधार हुआ है।

English summary: The National Disaster Management Authority (NDMA) has reviewed the flood warning system for the Ghepan Lake in Lahaul-Spiti district of Himachal Pradesh. The team assessed the technical aspects of the proposed system, which is designed to issue advance warnings ahead of a potential flood. The NDMA officials emphasized the need for collective efforts to tackle disaster risks, including initiatives such as afforestation. The team also reviewed flood protection measures along the Beas river, where rising water levels have caused damage in recent years. META: एनडीएमए ने लाहौल-स्पीति के घेपन झील के लिए बाढ़ चेतावनी प्रणाली की समीक्षा की, जो जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर वृद्धि के कारण आपदा जोखिम को बढ़ाने वाली है।

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