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ZEE5 ने हटाई फिल्म ‘Satluj’: क्या सरकार ने लगाया बैन? जानें पूरा मामला

प्रमुख तथ्य हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित और दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘Satluj’ को ZEE5 ने भारत में अपने OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। यह फिल्म 3 जुलाई को रिलीज़ हुई थी, लेकिन दो दिनों…

प्रमुख तथ्य

हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित और दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'Satluj' को ZEE5 ने भारत में अपने OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। यह फिल्म 3 जुलाई को रिलीज़ हुई थी, लेकिन दो दिनों के भीतर ही इसे हटा लिया गया। ZEE5 का कहना है कि 'वर्तमान घटनाक्रम' के कारण यह कदम उठाया गया है, जबकि खबरों के अनुसार सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत फिल्म की जांच शुरू कर दी है।

पूरा मामला

फिल्म 'Satluj' 1980-90 के दशक में पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। इसमें राज्य द्वारा जबरन गायब करने, अवैध हिरासत और अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं के आरोपों को दर्शाया गया है। फिल्म को पहले सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाना था, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने 127 कटौती की सिफारिश की, जिसके बाद निर्माताओं ने OTT रिलीज़ का रास्ता चुना।

कानूनी पहलू

OTT प्लेटफॉर्म्स पर सीधे रिलीज़ होने वाली सामग्री को CBFC प्रमाणन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि वे सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत आते हैं। हालांकि, धारा 69A सरकार को कुछ सीमित आधारों पर ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने का अधिकार देती है, जैसे भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, आदि।

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के संस्थापक अपर गुप्ता के अनुसार, यदि 'Satluj' के खिलाफ धारा 69A के तहत कार्रवाई शुरू की गई है, तो सरकार को एक तर्कसंगत लिखित आदेश जारी करना होगा, जिसमें यह स्पष्ट हो कि सामग्री किस कानूनी आधार पर ब्लॉक की गई है। साथ ही, प्रकाशक को सुनवाई का मौका दिया जाना चाहिए और निर्धारित समिति द्वारा समीक्षा की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के श्रेया सिंघल मामले में धारा 69A को बरकरार रखा था, क्योंकि इसमें प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय शामिल थे। हालांकि, IT नियम, 2021 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती के तहत है।

प्रभाव और आगे की राह

फिल्म निर्माता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ब्लॉकिंग ऑर्डर को चुनौती दे सकते हैं। अपर गुप्ता का कहना है कि श्रेया सिंघल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ब्लॉकिंग ऑर्डर के खिलाफ न्यायिक समीक्षा की उपलब्धता को स्पष्ट रूप से सुरक्षित रखा था। निर्माताओं को ब्लॉकिंग ऑर्डर का खुलासा कराने और अंतर-विभागीय समिति के समक्ष कार्यवाही में भाग लेने का प्रयास करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • सवाल: क्या सरकार ने फिल्म 'Satluj' पर बैन लगाया है?
    जवाब: अभी तक कोई आधिकारिक ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी नहीं हुआ है, लेकिन खबरों के अनुसार सरकार ने Section 69A के तहत फिल्म की जांच शुरू कर दी है। ZEE5 ने 'वर्तमान घटनाक्रम' का हवाला देते हुए फिल्म को हटाया है।
  • सवाल: फिल्म 'Satluj' में क्या विवाद है?
    जवाब: फिल्म 1980-90 के दशक में पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान जबरन गायब करने, अवैध हिरासत और अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं के आरोपों पर आधारित है। CBFC ने 127 कटौती की सिफारिश की थी।
  • सवाल: OTT प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप के क्या नियम हैं?
    जवाब: OTT प्लेटफॉर्म्स को CBFC से प्रमाणन की आवश्यकता नहीं है, लेकिन वे IT Rules, 2021 के तहत आते हैं। सरकार Section 69A के तहत सामग्री को ब्लॉक कर सकती है।
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