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पश्चिम बंगाल के चाय बागानों के लिए 313 करोड़ रुपये का आवंटन: क्या है पीएम चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना?

मुख्य बातें पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने चाय बागान श्रमिकों के कल्याण के लिए 313 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह राशि प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना (PMCSPY) के तहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने…

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने चाय बागान श्रमिकों के कल्याण के लिए 313 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह राशि प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना (PMCSPY) के तहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने 5 जुलाई 2026 को इसकी घोषणा की।

योजना का विवरण

PMCSPY के तहत 177 करोड़ रुपये शैक्षिक बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता हस्तक्षेप के लिए, 72 करोड़ रुपये स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन के लिए, और 63 करोड़ रुपये 321 विश्राम गृहों (88 पहाड़ियों में और 233 मैदानों में) के निर्माण के लिए आवंटित किए गए हैं। उत्तरी बंगाल विकास विभाग कार्यान्वयन एजेंसी होगी और स्वास्थ्य विभाग, पश्चिम बंगा समग्र शिक्षा मिशन और जिला प्रशासन के साथ समन्वय करेगा।

पृष्ठभूमि

PMCSPY की घोषणा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 के केंद्रीय बजट में की थी। यह योजना असम और पश्चिम बंगाल के चाय बागान श्रमिकों के लिए बेहतर स्कूल, स्वास्थ्य देखभाल और आवास प्रदान करने के लिए बनाई गई थी। इसके लिए 1,000 करोड़ रुपये का कोष आवंटित किया गया था।

पश्चिम बंगाल में विवाद

केंद्रीय वित्त मंत्री ने 25 मार्च 2026 को लोकसभा में कहा कि असम सरकार ने योजना को लागू किया और 293 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जबकि पश्चिम बंगाल ने इसे लागू नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने जानबूझकर योजना को रोका। राज्य स्तरीय समिति नहीं बनने के कारण योजना लागू नहीं हो सकी।

चाय बागानों की स्थिति

उत्तरी बंगाल में लगभग 250 प्रमुख चाय बागान हैं, जो दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में फैले हैं। इनमें 3.5 लाख से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। लगभग 20-25 चाय बागान बंद हैं, और कुपोषण से मौतों की खबरें आई हैं।

विशेषज्ञों की राय

पश्चिम बंगा चा मजूर समिति (PBCMS) ने कहा कि 313 करोड़ रुपये 3.5 लाख श्रमिकों के लिए अपर्याप्त है, जो प्रति व्यक्ति मात्र 9,000 रुपये बैठता है। संघ ने बजट में बंद बागानों के मुद्दे को संबोधित न करने की आलोचना की।

सरकार के अन्य कदम

राज्य सरकार ने चाय श्रमिक विकास बोर्ड स्थापित करने की घोषणा की, जो स्वास्थ्य, आवास और सामाजिक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन की देखरेख करेगा। साथ ही, चाय पर्यटन के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की सीमा 30% से घटाकर 15% कर दी गई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना क्या है?

यह केंद्र सरकार की योजना है जिसका उद्देश्य चाय बागान श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और पोषण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

पश्चिम बंगाल में इस योजना के तहत कितना फंड आवंटित किया गया?

राज्य सरकार ने 313 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें 177 करोड़ शिक्षा, 72 करोड़ स्वास्थ्य और 63 करोड़ विश्राम गृहों के लिए हैं।

योजना से कितने श्रमिक लाभान्वित होंगे?

उत्तरी बंगाल के लगभग 3.5 लाख चाय बागान श्रमिक इस योजना से लाभान्वित होंगे।

पहले यह योजना पश्चिम बंगाल में लागू क्यों नहीं हुई?

पिछली सरकार ने राज्य स्तरीय समिति नहीं बनाई, जो योजना लागू करने के लिए आवश्यक थी। केंद्र ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने जानबूझकर योजना को लागू नहीं किया।

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