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विजयपुरा के किसान सीखेंगे टिकाऊ डेयरी फार्मिंग, बीएलडीई और अक्षय कल्पा के बीच समझौता

मुख्य तथ्य विजयपुरा स्थित बीएलडीई सोसाइटी और तुमकुरु स्थित अक्षय कल्पा ग्रुप ने किसानों को टिकाऊ डेयरी फार्मिंग का प्रशिक्षण देने के लिए समझौता किया है। इसके तहत पहले बैच में 20 किसानों को बुधवार…

मुख्य तथ्य

विजयपुरा स्थित बीएलडीई सोसाइटी और तुमकुरु स्थित अक्षय कल्पा ग्रुप ने किसानों को टिकाऊ डेयरी फार्मिंग का प्रशिक्षण देने के लिए समझौता किया है। इसके तहत पहले बैच में 20 किसानों को बुधवार को टिपटूर स्थित अक्षय कल्पा परिसर में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया।

प्रशिक्षण का विवरण

ये किसान शेड निर्माण, गायों को खिलाने और चारा प्रबंधन, बछड़ों की देखभाल, मुर्गी पालन और जैविक प्रणाली के तहत विभिन्न सब्जियों की खेती की उन्नत तकनीकों का अध्ययन करेंगे। बीएलडीई डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. वाई.एम. जयराज ने बस को हरी झंडी दिखाई और उम्मीद जताई कि किसान अल्पकालिक पाठ्यक्रम में सभी कौशल सीखेंगे।

परियोजना का विस्तार

प्रो. जयराज ने कहा कि यह बीएलडीई सोसाइटी और अक्षय कल्पा फाउंडेशन तथा कृषिकल्पा फाउंडेशन की कई संयुक्त पहलों में से पहली है। उन्होंने बताया कि किसानों को अक्षय कल्पा संस्थान परिसर में उन्नत तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन और प्रशिक्षण मिलेगा, जो देश में वैज्ञानिक और जैविक डेयरी फार्मिंग का मॉडल है।

मंत्री का दृष्टिकोण

बीएलडीई सोसाइटी के अध्यक्ष और मंत्री एम.बी. पाटिल उत्तर कर्नाटक के सूखाग्रस्त जिलों के किसानों की समृद्धि बढ़ाने के लिए इस संयुक्त परियोजना के विस्तार और विविधीकरण पर जोर देते हैं। रजिस्ट्रार आर.वी. कुलकर्णी ने कहा कि किसानों को वैज्ञानिक शेड प्रबंधन, गायों के स्वास्थ्य, सफाई और आधुनिक तकनीक के माध्यम से डेयरी फार्मिंग को लाभदायक बनाने की जानकारी मिलेगी।

प्रभाव और भविष्य की योजना

बीएलडीई सोसाइटी के संचार समन्वयक महांतेश बिरादर ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण सत्र विजयपुरा जिले के डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देंगे और युवाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर कर्नाटक में डेयरी सबसे उपेक्षित आजीविका क्षेत्रों में से एक है और इसे ऐसे हस्तक्षेपों के माध्यम से बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

किसानों को क्या सीखने को मिलेगा?

  • शेड निर्माण की उन्नत तकनीक
  • गायों को खिलाने और चारा प्रबंधन
  • बछड़ों की देखभाल और मुर्गी पालन
  • जैविक प्रणाली के तहत सब्जियों की खेती
  • रासायनिक मुक्त और गुणवत्तापूर्ण दूध उत्पादन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य किसानों को टिकाऊ डेयरी फार्मिंग की तकनीक सिखाना है, जिससे उत्तर कर्नाटक के सूखाग्रस्त जिलों में किसानों की समृद्धि बढ़े।

प्रशिक्षण कहाँ होगा?

प्रशिक्षण तुमकुरु जिले के टिपटूर स्थित अक्षय कल्पा संस्थान परिसर में होगा।

कितने किसान पहले बैच में शामिल हैं?

पहले बैच में बबलेश्वर और टिकोटा तालुक के 20 किसान शामिल हैं।

यह परियोजना किन संगठनों के सहयोग से चल रही है?

यह बीएलडीई सोसाइटी, अक्षय कल्पा फाउंडेशन और कृषिकल्पा फाउंडेशन के सहयोग से चल रही है।

Source: www.thehindu.com

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