Himachal | Dehra Court

Kangra News: मौखिक समझौते पर 10 हजार में जमीन खरीद का दावा अदालत ने किया खारिज

प्रमुख तथ्य देहरागोपीपुर (कांगड़ा) की एक अदालत ने एक ऐसे मामले में अहम फैसला सुनाया है, जिसमें वादी ने महज 10,000 रुपये में 10 मरला जमीन खरीदने के मौखिक समझौते का दावा किया था। अतिरिक्त…

प्रमुख तथ्य

देहरागोपीपुर (कांगड़ा) की एक अदालत ने एक ऐसे मामले में अहम फैसला सुनाया है, जिसमें वादी ने महज 10,000 रुपये में 10 मरला जमीन खरीदने के मौखिक समझौते का दावा किया था। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सपना पांडेय की अदालत ने इस दावे को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया।

पूरा मामला

खुंडियां तहसील के एक व्यक्ति ने वर्ष 2016 में एक अन्य व्यक्ति को आर्थिक तंगी के चलते 10,000 रुपये दिए थे। उसने आरोप लगाया कि इस राशि के बदले में प्रतिवादी ने 10 मरला जमीन बेचने का मौखिक समझौता किया था। हालांकि, प्रतिवादी ने न तो बिक्री पत्र (सेल डीड) किया और न ही जमीन का नामांतरण करवाया।

वादी ने इस मामले में सिविल जज देहरा के समक्ष दावा दायर किया था, जिसे 2020 में खारिज कर दिया गया। इसके बाद उसने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की।

अदालत का फैसला

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सपना पांडेय ने अपने फैसले में कहा कि केवल प्रतिवादी के खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई हो जाने से वादी का दावा स्वतः सिद्ध नहीं माना जा सकता। दावा करने वाले पक्ष को अपने आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करना होता है।

अदालत ने पाया कि वादी दावे के समर्थन में कोई लिखित समझौता, दस्तावेज या लेन-देन का प्रमाण पेश नहीं कर सका। गवाहों के बयान भी आपस में मेल नहीं खा रहे थे। इसके अलावा, अदालत ने कहा कि यदि वास्तव में ऐसा कोई लेन-देन हुआ होता, तो वादी पंचायत या राजस्व अधिकारियों के पास शिकायत कर सकता था, लेकिन रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है।

फैसले का प्रभाव

इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीन जैसी अचल संपत्ति के लेन-देन में मौखिक समझौते कानूनी रूप से मान्य नहीं होते। अदालत ने सिविल जज देहरा के 2020 के निर्णय को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।

पाठकों के लिए सीख

  • जमीन या अन्य अचल संपत्ति खरीदते समय हमेशा लिखित और पंजीकृत बिक्री पत्र (सेल डीड) बनवाएं।
  • मौखिक समझौते कानूनी रूप से लागू नहीं होते और विवाद की स्थिति में सबूत के अभाव में खारिज हो सकते हैं।
  • लेन-देन का प्रमाण रखें, जैसे बैंक स्टेटमेंट, रसीद या गवाह।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

देहरा अदालत ने किस आधार पर दावा खारिज किया?

अदालत ने कहा कि वादी मौखिक समझौते का कोई लिखित सबूत या लेन-देन का प्रमाण पेश नहीं कर सका, और गवाहों के बयान भी असंगत थे।

क्या मौखिक समझौते पर जमीन खरीद कानूनी रूप से मान्य है?

भारतीय कानून के अनुसार, जमीन जैसी अचल संपत्ति के हस्तांतरण के लिए लिखित और पंजीकृत बिक्री पत्र (सेल डीड) अनिवार्य है। मौखिक समझौता कानूनी रूप से लागू नहीं होता।

इस मामले में वादी ने क्या दावा किया था?

वादी ने दावा किया था कि 2016 में उसने एक व्यक्ति को 10,000 रुपये दिए और बदले में 10 मरला जमीन खरीदने का मौखिक समझौता हुआ, लेकिन प्रतिवादी ने न तो बिक्री पत्र किया और न ही जमीन का नामांतरण।

Follow us on Google News

Explore more

धर्मशाला: फर्नीचर, खिलौने और शिक्षा किट से संवरेंगे आंगनबाड़ी केंद्र, बच्चों को मिलेंगी बे — Himachal briefing

धर्मशाला: फर्नीचर, खिलौने और शिक्षा किट से संवरेंगे आंगनबाड़ी केंद्र, बच्चों को मिलेंगी बे — Himachal briefing HimachalGovt.com has prepared an original…

More on Himachal from Himachal Pradesh

चक्कीमोड़ में फिर मंडराया खतरा : खिसका मलबा, टूटे कंक्रीट के डंगे और फटीं सुरक्षा शीटें — Himachal briefing

चक्कीमोड़ में फिर मंडराया खतरा : खिसका मलबा, टूटे कंक्रीट के डंगे और फटीं सुरक्षा शीटें — Himachal briefing HimachalGovt.com has prepared…

हिमाचल मौसम: 31 अगस्त से फिर रफ्तार पकड़ सकता है मानसून, चार दिन कई भागों में भारी बारिश क — Himachal briefing

हिमाचल मौसम: 31 अगस्त से फिर रफ्तार पकड़ सकता है मानसून, चार दिन कई भागों में भारी बारिश क — Himachal briefing…

नई व्यवस्था: फाइलों और बैठकों के बीच पढ़ाई भी करेंगे आईएएस अफसर, करनी होगी नियमित ऑनलाइन ल — Himachal briefing

नई व्यवस्था: फाइलों और बैठकों के बीच पढ़ाई भी करेंगे आईएएस अफसर, करनी होगी नियमित ऑनलाइन ल — Himachal briefing HimachalGovt.com has…