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अमेरिकी दलों का fcra संशोधनों पर एकजुट विरोध, कैपिटल हिल में चिंता

मुख्य तथ्य अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के सदस्यों ने भारत के विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई है। उनका कहना है कि इन…

मुख्य तथ्य

अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के सदस्यों ने भारत के विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई है। उनका कहना है कि इन संशोधनों से नागरिक समाज संगठनों, विशेषकर ईसाई समूहों, पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

विस्तार से जानकारी

सीनेट विदेश संबंध समिति के प्रमुख सीनेटर जेम्स रिश ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक बयान में कहा, "भारत का FCRA गैर-सरकारी संगठनों और विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले समूहों पर बोझिल और अस्पष्ट प्रतिबंध लगाता है, जिससे उनका दैनिक संचालन लगभग असंभव हो जाता है। अमेरिकी संबद्ध ईसाई मंत्रालयों की संपत्ति जब्त करने के लिए FCRA का उपयोग करना गहराई से चिंताजनक होगा।"

रिश ने आगे कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकियों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी है, और अमेरिका उन देशों को बेनकाब करने में संकोच नहीं करेगा जो ईसाइयों और अन्य धार्मिक समूहों के मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं।"

डेमोक्रेटिक पार्टी के एक कांग्रेसी सहयोगी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "द्विदलीय आधार पर कांग्रेस ने FCRA के नागरिक समाज पर संभावित प्रभाव पर चिंता जताई है। विशेष रूप से प्राधिकरणों को FCRA लाइसेंस खोने वाले संगठनों की संपत्ति जब्त करने की व्यापक शक्ति देना गंभीर सवाल उठाएगा।"

प्रभाव और प्रतिक्रियाएं

कैपिटल हिल के सूत्रों के अनुसार, कई निर्वाचित प्रतिनिधियों ने निजी तौर पर इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया है और अधिक जानकारी मांग रहे हैं। भारतीय राजनयिकों ने जोर दिया है कि प्रस्तावित संशोधनों का कानूनी और वैध संगठनों पर अनुचित प्रभाव नहीं पड़ेगा।

यह चिंता अमेरिकी ईसाई समूहों के लगातार अभियान के बाद बढ़ी है, जो मार्च 2026 में लोकसभा में पेश किए गए संशोधन विधेयक के खिलाफ हैं। मूल FCRA अधिनियम के तहत, सरकार किसी इकाई का FCRA लाइसेंस रद्द कर सकती है और उसकी संपत्ति को अपने कब्जे में ले सकती है। नए विधेयक में यह प्रावधान जोड़ा गया है कि यदि लाइसेंस नवीनीकृत नहीं होता है, तो विदेशी योगदान और संपत्ति अस्थायी रूप से केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित 'डिज़ाइनेटेड अथॉरिटी' के पास रहेगी। यदि निर्धारित अवधि में नया पंजीकरण नहीं होता है, तो संपत्ति स्थायी रूप से प्राधिकरण को हस्तांतरित हो जाएगी, जिसका उपयोग सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

मुस्लिम और ईसाई दोनों समूहों ने इन संशोधनों पर चिंता जताई है। भारतीय कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ने इसे 'खतरनाक' और 'चिंताजनक' बताया है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • FCRA संशोधनों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग पर नियंत्रण बढ़ाना है, लेकिन अमेरिकी सांसदों का मानना है कि इससे नागरिक समाज संगठनों की कार्यक्षमता प्रभावित होगी।
  • अमेरिकी सांसद क्रिस स्मिथ ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भारत सरकार को संशोधन वापस लेने के लिए कहने का आग्रह किया है।
  • भारत सरकार का कहना है कि संशोधन केवल अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए हैं, लेकिन विपक्षी दलों और धार्मिक समूहों ने इसका विरोध किया है।

FAQ

FCRA संशोधनों पर अमेरिकी सांसदों की मुख्य चिंता क्या है?

अमेरिकी सांसदों का मानना है कि प्रस्तावित संशोधनों से नागरिक समाज संगठनों, विशेषकर ईसाई समूहों, को विदेशी फंडिंग प्राप्त करने में कठिनाई होगी और उनकी संपत्ति जब्त हो सकती है।

सीनेटर जेम्स रिश ने FCRA संशोधनों पर क्या कहा?

सीनेटर जेम्स रिश ने इन संशोधनों को 'गहराई से चिंताजनक' बताया और कहा कि इससे अमेरिकी संबद्ध ईसाई मंत्रालयों पर उत्पीड़न बढ़ सकता है।

भारत सरकार का FCRA संशोधनों पर क्या रुख है?

भारतीय राजनयिकों ने जोर दिया है कि प्रस्तावित संशोधनों का कानूनी और वैध संगठनों पर अनुचित प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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