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उत्तर प्रदेश में ड्रोन सर्वे से नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की पहल

प्रमुख तथ्य उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार (13 जून, 2026) को घोषणा की कि नदियों में शून्य अपशिष्ट निर्वहन (जीरो डिस्चार्ज) के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु ड्रोन सर्वे मॉडल को कई जिलों में लागू…

प्रमुख तथ्य

उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार (13 जून, 2026) को घोषणा की कि नदियों में शून्य अपशिष्ट निर्वहन (जीरो डिस्चार्ज) के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु ड्रोन सर्वे मॉडल को कई जिलों में लागू किया जा रहा है। इस पहल के तहत गंगा, यमुना, गोमती, वरुणा और पांडु नदियों के 400 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र का ड्रोन सर्वे किया गया है।

विस्तृत जानकारी

नमामि गंगा और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों में सर्वेक्षण पूरे हो चुके हैं। इन सर्वेक्षणों से नदियों की स्थिति का सटीक आकलन, प्रदूषण स्रोतों की पहचान और ड्रेन डिस्चार्ज पॉइंट्स का मैपिंग संभव हो सका है। कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, हरदोई, बलिया, मेरठ और मिर्जापुर उन जिलों में शामिल हैं जो इस पहल से सबसे पहले लाभान्वित होंगे।

राज्य मिशन फॉर क्लीन गंगा के परियोजना निदेशक जोगिंदर सिंह ने कहा कि उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले हवाई सर्वेक्षण पूरे हो चुके हैं, जिससे सटीक भू-स्थानिक डेटासेट तैयार हुए हैं। इन्हें लाइव जीआईएस-आधारित ड्रेन डैशबोर्ड में एकीकृत किया जा रहा है, जिसमें 2डी और 3डी विज़ुअलाइज़ेशन की सुविधा है। यह डैशबोर्ड बेसिन स्तर पर प्रदूषण निगरानी, हॉटस्पॉट की पहचान और ड्रेन उपचार उपायों को प्राथमिकता देने में सक्षम बनाता है।

जोगिंदर सिंह ने इसे अपनी तरह की पहली पहल बताया, जहां LiDAR-आधारित वैज्ञानिक डेटा को ड्रोन सर्वेक्षणों से उत्पन्न दृश्य डेटा के साथ जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि जिला गंगा समितियों द्वारा समय पर फील्ड-स्तरीय सत्यापन किया जा रहा है, जिससे लक्षित हस्तक्षेप और मजबूत ड्रेन-आधारित प्रदूषण प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।

प्रभाव और लाभ

इस पहल से न केवल नदियों का कायाकल्प होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण के अवसर भी पैदा होंगे। डिजिटल इमेजिंग ड्रोन तकनीक ने नदी बहाली परियोजनाओं की योजना, कार्यान्वयन और निगरानी में क्रांति ला दी है। पहले सैन्य टोही के लिए उपयोग किए जाने वाले ड्रोन अब हल्के, डिजिटल रूप से स्थिर और AI-संवर्धित हो गए हैं, जो पर्यावरण संरक्षण में प्रभावी उपकरण बन गए हैं।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • ड्रोन सर्वे से प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान होगी।
  • जीरो डिस्चार्ज लक्ष्य से नदियों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वच्छता के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
  • यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ड्रोन सर्वे से किन नदियों का मूल्यांकन किया गया?

गंगा, यमुना, गोमती, वरुणा और पांडु नदियों का 400 किमी से अधिक क्षेत्र का ड्रोन सर्वे किया गया।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?

नदियों में शून्य अपशिष्ट निर्वहन (जीरो डिस्चार्ज) सुनिश्चित करना और प्रदूषण स्रोतों की सटीक पहचान कर उन्हें नियंत्रित करना है।

ड्रोन सर्वे से किन जिलों को लाभ होगा?

कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, हरदोई, बलिया, मेरठ और मिर्जापुर सहित कई जिलों को इस पहल से लाभ मिलेगा।

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