Desh Duniya | Harish Parvathaneni

Unsc सुधार केवल अस्थायी सदस्यता बढ़ाने तक सीमित रहा तो विफलता होगी: भारत

मुख्य तथ्य भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सुधार केवल अस्थायी सदस्यता बढ़ाने तक सीमित रहा, तो यह विफलता की कगार पर होगा। संयुक्त…

मुख्य तथ्य

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सुधार केवल अस्थायी सदस्यता बढ़ाने तक सीमित रहा, तो यह विफलता की कगार पर होगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पार्वथनेनी ने सोमवार (15 जून, 2026) को इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशन (IGN) की बैठक में यह बात कही।

विस्तृत जानकारी

राजदूत पार्वथनेनी ने कहा, "UNSC सुधार पूरी तरह से अपर्याप्त होगा और विफलता की सीमा पर होगा यदि विस्तार केवल अस्थायी श्रेणी तक सीमित रहा, क्योंकि इससे P5 की निर्णय लेने की शक्ति संरचना में मूलभूत बदलाव नहीं होगा।" उन्होंने आगे कहा कि समूह और सदस्य देश वास्तविक और सार्थक सुधारों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे हैं।

पार्वथनेनी 'एलिमेंट्स पेपर' पर चर्चा कर रहे थे, जो UNSC सुधार पर सदस्य देशों के बीच सहमति और असहमति के बिंदुओं को दर्शाता है। भारत ने इस पेपर की आलोचना करते हुए कहा कि यह न तो वास्तविक स्थिति को सटीक रूप से दर्शाता है और न ही अधिकांश सदस्य देशों की भावनाओं को ध्यान में रखता है।

भारत का रुख

भारत लंबे समय से UNSC में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार की मांग करता रहा है। दिल्ली का मानना है कि 1945 में स्थापित 15 सदस्यीय परिषद 21वीं सदी के लिए उपयुक्त नहीं है और समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती। भारत ने स्पष्ट किया कि वह स्थायी सदस्यता के विस्तार की वकालत करके परिषद में अधिक संतुलन और न्याय लाना चाहता है।

भारत ने 'एलिमेंट्स पेपर' में फिक्स्ड रीजनल सीट्स के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। पार्वथनेनी ने कहा कि यह प्रस्ताव स्थायी श्रेणी का विस्तार नहीं करता, क्षेत्रीयता की अवधारणा को कमजोर करता है, और छोटे द्वीपीय विकासशील राज्यों (SIDS) के मामले को कमजोर करता है।

प्रभाव और आगे की राह

भारत ने UNSC सुधार पर पाठ-आधारित वार्ता की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि चर्चा अधिक उद्देश्यपूर्ण और परिणाम-उन्मुख हो सके। उन्होंने IGN के सह-अध्यक्षों से स्पष्ट मील के पत्थर और समयसीमा के साथ एक पाठ तैयार करने का आह्वान किया। भारत ने यह भी कहा कि "जब तक सब कुछ तय नहीं हो जाता, कुछ भी तय नहीं" का दृष्टिकोण प्रगति में बाधा नहीं बनना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • भारत ने UNSC सुधार पर क्या रुख अपनाया है? भारत स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार चाहता है, ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में संतुलन आए।
  • 'एलिमेंट्स पेपर' में क्या खामियां बताई गईं? भारत ने कहा कि इसमें स्थायी सदस्यता विस्तार के समर्थन को कम करके दिखाया गया है और फिक्स्ड रीजनल सीट्स का प्रस्ताव भ्रामक है।
  • भारत ने वार्ता प्रक्रिया में क्या बदलाव मांगा? भारत ने पाठ-आधारित बातचीत और स्पष्ट समयसीमा के साथ लक्ष्य निर्धारित करने की मांग की।
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