प्रमुख तथ्य
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को उमर खालिद और शरीजील इमाम की नई जमानत याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। दोनों ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित बड़ी साजिश के मामले में जमानत मांगी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमेध कुमार सेठी ने कड़कड़डूमा कोर्ट में सुनवाई के लिए 4 जुलाई की तारीख तय की है।
याचिका का आधार
खालिद और इमाम ने अपनी याचिकाओं में परिस्थितियों में बदलाव का हवाला दिया है। उन्होंने 18 मई को सुप्रीम कोर्ट की पीठ (न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और उज्जल भुयान) द्वारा जम्मू-कश्मीर निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को नार्को-टेरर मामले में जमानत देने के फैसले का उल्लेख किया है। शीर्ष अदालत ने 5 जनवरी के फैसले में अपनाए गए तर्क पर गंभीर आपत्ति जताई थी, यह कहते हुए कि यह यूनियन ऑफ इंडिया बनाम केए नजीब (2021) में तीन-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा निर्धारित बाध्यकारी सिद्धांतों को सही ढंग से लागू करने में विफल रहा। उस फैसले में माना गया था कि लंबी कैद और मुकदमे में देरी यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर वैधानिक प्रतिबंधों को ओवरराइड कर सकती है।
याचिकाओं में क्या कहा गया?
इमाम ने अपनी याचिका में कहा, "आवेदक लगभग छह साल से हिरासत में है। मुकदमा आरोप तय करने तक भी नहीं पहुंचा है। अभियोजन पक्ष 900 से अधिक गवाहों की जांच करने का प्रस्ताव करता है। निर्विवाद तथ्यों पर, केए नजीब का सही ढंग से लागू किया गया सिद्धांत, जैसा कि सैयद इफ्तिखार अंद्राबी के मामले में बाध्यकारी घोषित किया गया, आवेदक के मामले पर पूरी ताकत से लागू होता है।" खालिद ने अपनी याचिका में कहा, "यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि 38 वर्षीय आवेदक, जो एक शोधकर्ता और विद्वान है, को 13 सितंबर को विवादित एफआईआर में मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया और याचिका दाखिल करने की तिथि तक उसने 5 साल और 9 महीने से अधिक समय हिरासत में बिताया है। इस प्रकार, कारावास की बढ़ी हुई अवधि परिस्थितियों में एक और बदलाव है जो आवेदक को जमानत का हकदार बनाती है।"
पिछला फैसला
गौरतलब है कि 5 जनवरी को अदालत ने खालिद और इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जबकि पांच सह-आरोपियों को राहत दी गई थी। न्यायमूर्ति कुमार और अंजारिया की पीठ ने माना था कि खालिद और इमाम का फरवरी 2020 के दंगों की साजिश में "केंद्रीय और प्रारंभिक" योगदान था, और यह कि लंबी कैद अकेले यूएपीए मामलों में जमानत का औचित्य साबित नहीं कर सकती। फैसले ने सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले एनआईए बनाम जहूर अहमद शाह वताली पर भी भरोसा किया, जिसने यूएपीए के तहत जमानत के मानकों को कड़ा कर दिया था।
आगे की प्रक्रिया
अब 4 जुलाई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। इस बीच, खालिद और इमाम जेल में बंद हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उमर खालिद और शरीजील इमाम ने नई जमानत याचिका क्यों दायर की?
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले का हवाला देते हुए परिस्थितियों में बदलाव का दावा किया है, जिसमें लंबी कैद और मुकदमे में देरी के आधार पर जमानत दी गई थी।
इन याचिकाओं पर सुनवाई कब होगी?
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमेध कुमार सेठी ने सुनवाई के लिए 4 जुलाई की तारीख तय की है।
पिछली जमानत याचिका क्यों खारिज हुई?
5 जनवरी को कोर्ट ने खालिद और इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, उन्हें साजिश में केंद्रीय भूमिका का दोषी ठहराते हुए कहा था कि लंबी कैद अकेले जमानत का आधार नहीं हो सकती।
स्रोत: www.hindustantimes.com