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Tmc विद्रोही गुट ‘असली tmc’ का दर्जा पाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से मिलेगा, संवैधानिक विशेषज्ञ ने उठाए सवाल

मुख्य तथ्य तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विद्रोही सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से ‘असली TMC’ के रूप में मान्यता देने की मांग करने का फैसला किया है। हालांकि, पूर्व लोकसभा महासचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ…

मुख्य तथ्य

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विद्रोही सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से 'असली TMC' के रूप में मान्यता देने की मांग करने का फैसला किया है। हालांकि, पूर्व लोकसभा महासचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फैसला चुनाव आयोग का है, न कि लोकसभा अध्यक्ष का।

विद्रोही गुट की योजना

विद्रोही गुट ने शुक्रवार (12 जून 2026) को 19 लोकसभा सदस्यों के समर्थन का दावा किया और घोषणा की कि वे सोमवार (15 जून 2026) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर 'असली TMC' संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग करेंगे।

संवैधानिक विशेषज्ञ की राय

पीडीटी आचार्य ने रविवार (14 जून 2026) को कहा, “असली TMC तय करने की शक्ति चुनाव आयोग के पास है। सुभाष देसाई मामले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने स्पष्ट किया था कि जब दो या अधिक गुट असली पार्टी होने का दावा करें, तो अध्यक्ष दल-बदल विरोधी कानून के तहत फैसला कर सकते हैं।” उन्होंने कहा कि विद्रोही गुट को चुनाव आयोग से संपर्क करना चाहिए और यह साबित करना चाहिए कि उनके पास सबसे अधिक सांसद और विधायक हैं तथा पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर उनका नियंत्रण है।

अलग सीटों पर स्थिति

आचार्य ने दल-बदल विरोधी कानून और संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि फिलहाल विद्रोहियों को अलग समूह नहीं माना जा सकता और उन्हें अलग सीटें आवंटित नहीं की जा सकतीं, क्योंकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC को पहले ही लोकसभा में सीटें आवंटित की जा चुकी हैं।

पार्टी में बगावत का दायरा

TMC में विद्रोह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद शुरू हुआ। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 19 ने विद्रोह किया है, जबकि राज्यसभा में 13 में से तीन ने इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी सुदीप बंद्योपाध्याय ने शनिवार (13 जून 2026) को विद्रोही गुट का साथ दिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। विद्रोही गुट चाहता है कि बंद्योपाध्याय लोकसभा में समूह का नेतृत्व करें।

FAQ

क्या लोकसभा अध्यक्ष 'असली TMC' का फैसला कर सकते हैं?

संवैधानिक विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य के अनुसार, यह अधिकार चुनाव आयोग के पास है, लोकसभा अध्यक्ष के पास नहीं।

विद्रोही गुट के पास कितने सांसद हैं?

विद्रोही गुट ने 19 लोकसभा सांसदों के समर्थन का दावा किया है।

क्या विद्रोही गुट को अलग सीटें मिल सकती हैं?

नहीं, जब तक चुनाव आयोग उन्हें अलग समूह का दर्जा नहीं देता, तब तक उन्हें अलग सीटें नहीं मिल सकतीं।

सुदीप बंद्योपाध्याय ने विद्रोही गुट का साथ क्यों दिया?

सुदीप बंद्योपाध्याय, जो ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी थे, ने पार्टी में बढ़ते असंतोष के बीच विद्रोही गुट का साथ दिया।

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