प्रमुख तथ्य
तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए 20 सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होकर अपनी नई भूमिकाएं तय कर ली हैं। ये सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन कर रहे हैं। पार्टी में पदानुक्रम पुराने TMC ढांचे के अनुरूप रखा गया है।
विस्तार से जानकारी
रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने के बाद बागी सांसदों ने यह फैसला लिया। काकोली घोष दस्तीदार, जो बागी सांसदों की प्रमुख चेहरा हैं, ने कहा, 'चर्चा जारी है। कोई बदलाव नहीं है। पिछली व्यवस्था जारी रहेगी।' दो सूत्रों के अनुसार, दस्तीदार NCPI की मुख्य सचेतक होंगी, जबकि वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय फ्लोर लीडर और शताब्दी रॉय उपनेता होंगी। बंद्योपाध्याय पहले TMC के लोकसभा फ्लोर लीडर थे, लेकिन पिछले साल अगस्त में अभिषेक बनर्जी ने उनकी जगह ली थी।
NDA को मजबूती
इन सांसदों के समर्थन से NDA की लोकसभा में संख्या 294 से बढ़कर 314 हो गई है, हालांकि दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी भी 46 सीटें कम हैं। राज्यसभा में सत्ता पक्ष के पास अगले चुनावों के बाद 155 सीटें हो सकती हैं, जो दो-तिहाई से सिर्फ 8 सीटें कम हैं।
विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने इस दलबदल की कड़ी आलोचना की है। RJD नेता मनोज कुमार झा ने कहा, 'क्या आपने कल से पहले इस पार्टी का नाम सुना था? एक ऐसी पार्टी जिसे दो विधानसभा चुनावों में सिर्फ 800 वोट मिले, उसे रातों-रात 20 सांसद मिल गए। भारतीय लोकतंत्र का यह हाल है कि दुनिया में हमारी छवि बदल गई है।'
दलबदल कानून से बचाव
रविवार को TMC वफादार सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा जिसमें कहा गया कि दसवीं अनुसूची के तहत 'विभाजन' अब संभव नहीं है और TMC एक अविभाज्य पार्टी है। विश्लेषकों का कहना है कि NCPI में विलय से बागी सांसद दलबदल कानून के दायरे में नहीं आएंगे। BJP के लिए भी यह फायदेमंद है क्योंकि इससे पश्चिम बंगाल में स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम होगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में हलचल
राज्य विधानसभा में TMC के कम से कम 59 विधायकों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अपना विपक्ष का नेता चुन लिया है। देखना होगा कि वे पार्टी छोड़ते हैं या असली TMC होने का दावा करते हैं।
FAQ
TMC के कितने सांसदों ने NCPI जॉइन किया?
20 TMC सांसदों ने NCPI जॉइन किया और NDA को समर्थन दिया।
NCPI में कौन कौन से पद तय हुए हैं?
काकोली घोष दस्तीदार मुख्य सचेतक, सुदीप बंद्योपाध्याय फ्लोर लीडर और शताब्दी रॉय उपनेता होंगी।
क्या यह विलय दलबदल कानून से बचाता है?
हां, NCPI में विलय के बाद ये सांसद दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल कानून के दायरे में नहीं आएंगे।
Source: www.hindustantimes.com