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टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने ncpi में किया विलय, नई राजनीतिक हलचल

परिचय पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया है। यह कदम उन सांसदों…

परिचय

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया है। यह कदम उन सांसदों द्वारा उठाया गया है जो पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट थे और अब एक नए राजनीतिक गठबंधन के तहत एकजुट हुए हैं।

मुख्य तथ्य

  • विलय की घोषणा: 20 टीएमसी सांसदों ने NCPI में शामिल होने की घोषणा की है।
  • NCPI का पंजीकरण: यह पार्टी 2 फरवरी 2023 को हावड़ा जिले के संकरैल में पंजीकृत हुई थी।
  • पार्टी का प्रतीक: NCPI का चुनाव चिन्ह 'सात किरणों वाली पेन निब' है।
  • नेतृत्व: पार्टी की अध्यक्ष शिउली कुंडू हैं, जो कलकत्ता उच्च न्यायालय में अधिवक्ता हैं।

विलय की रणनीति

बागी सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी में विलय करना चुना। कानून के अनुसार, यदि किसी राजनीतिक दल के दो-तिहाई विधायक किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो न तो विलय करने वालों पर और न ही मूल दल में रहने वालों पर अयोग्यता लागू होती है। इस रणनीति के तहत, बागी सांसदों ने NCPI को अपना नया राजनीतिक घर बनाया है।

प्रमुख बागी नेता

इस विलय में शामिल प्रमुख नेताओं में काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय शामिल हैं। काकोली घोष दस्तीदार ने राष्ट्रीय हित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए के साथ काम करने की इच्छा जताई है। वहीं, सबसे वरिष्ठ बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने संसद सत्र शुरू होने पर टीएमसी के रूप में मान्यता प्राप्त करने की योजना बनाई है, जिसमें वे दो-तिहाई बहुमत का दावा कर रहे हैं।

NCPI का पृष्ठभूमि

NCPI की स्थापना 2015 में त्रिपुरा में शिउली कुंडू ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के रूप में की थी। बाद में 2 फरवरी 2023 को इसका नाम बदलकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया कर दिया गया। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में चार उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से तीन सीटों (चवामनु, अम्बासा और कैलाशहर) पर उम्मीदवारों को NOTA से भी कम वोट मिले। पार्टी का नारा है: 'अपने अधिकारों को बचाने के लिए राजनीतिक दलबदलुओं को अस्वीकार करें'।

प्रभाव और आगे की राह

इस विलय से टीएमसी को संसद में अपनी संख्यात्मक ताकत में कमी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, बागी सांसदों का दावा है कि वे ही 'असली टीएमसी' हैं और वे संसद में अपनी पहचान बनाए रखेंगे। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है, खासकर आगामी चुनावों के मद्देनजर।

FAQ

NCPI क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?

NCPI (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) एक अमान्यता प्राप्त क्षेत्रीय राजनीतिक दल है, जिसे 2 फरवरी 2023 को हावड़ा के संकरैल में पंजीकृत किया गया था। इसकी स्थापना शिउली कुंडू ने 2015 में त्रिपुरा में नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के रूप में की थी।

टीएमसी के बागी सांसदों ने NCPI में विलय क्यों किया?

बागी सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए एक मजबूत गुट के रूप में NCPI में विलय किया। कानून के अनुसार, यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो न तो उन पर और न ही मूल दल में रहने वालों पर अयोग्यता लागू होती है।

इस विलय का टीएमसी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

इस विलय से टीएमसी को संसद में अपने सांसदों की संख्या में कमी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, बागी सांसदों का दावा है कि वे 'असली टीएमसी' हैं और संसद सत्र शुरू होने पर मान्यता की मांग करेंगे।

NCPI का चुनावी प्रदर्शन कैसा रहा है?

NCPI ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में चार उम्मीदवार उतारे थे, जो चवामनु, अम्बासा और कैलाशहर सीटों पर चुनाव लड़े। इनमें से अधिकांश को NOTA से भी कम वोट मिले।

स्रोत: www.thehindu.com

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