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Tmc के 20 बागी सांसदों का ncpi में विलय: लोकसभा में वोटिंग की राह आसान, लेकिन अयोग्यता का खतरा बरकरार

प्रमुख तथ्य तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने रविवार, 14 जून 2026 को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर घोषणा की कि वे नेशनल कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर…

प्रमुख तथ्य

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने रविवार, 14 जून 2026 को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर घोषणा की कि वे नेशनल कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर रहे हैं। इस गुट में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय, सताब्दी रॉय, माला रॉय, यूसुफ पठान जैसे प्रमुख सांसद शामिल हैं।

यह कदम दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत अयोग्यता से बचने की एक रणनीति मानी जा रही है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।

विलय का कानूनी पहलू

पूर्व लोकसभा महासचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ पी.डी.टी. आचार्य के अनुसार, "10वीं अनुसूची के तहत केवल मूल राजनीतिक दल ही किसी अन्य दल में विलय कर सकता है। उसके बाद ही सांसद या विधायक दावा कर सकते हैं कि उनका मूल दल विलय हो गया है और वे उस नए दल के सदस्य बन गए हैं। इस प्रकार, सांसद अकेले किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकते।"

हालांकि, जब तक स्पीकर इस मामले पर कोई फैसला नहीं देते, ये सांसद लोकसभा में किसी भी विधेयक के पक्ष में वोट कर सकते हैं। अयोग्यता की अंतिम मंजूरी स्पीकर के पास होती है, जिसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

राजनीतिक परिदृश्य

सरकार के सूत्रों के अनुसार, केंद्र मानसून सत्र (जुलाई मध्य से) में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 या परिसीमन विधेयक ला सकता है। अप्रैल में सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से चूक गई थी। ऐसे में बागी सांसदों का यह गुट सरकार के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि वे इन विधेयकों के पक्ष में वोट कर सकते हैं।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC ने अब तक स्पीकर के समक्ष अयोग्यता याचिका दायर नहीं की है।

विलय की रणनीति क्यों?

बागी सांसदों ने NCPI जैसे अल्पज्ञात दल में विलय करना चुना, ताकि वे चुनाव आयोग में 'असली TMC' होने का लंबा कानूनी संघर्ष करने से बच सकें। सुप्रीम कोर्ट के शिवसेना विभाजन मामले में फैसले के बाद, चुनाव आयोग 1971 के सादिक अली नियम के तहत तीन मापदंडों (पार्टी के उद्देश्य, विधायी बहुमत, और संगठनात्मक बहुमत) की जांच करता है, जो एक लंबी प्रक्रिया है।

विलय से उन्हें तत्काल संसदीय मान्यता मिल जाती है और वे एक अलग गुट के रूप में काम कर सकते हैं।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विलय अयोग्यता से बचने का कोई पुख्ता तरीका नहीं है, लेकिन यह स्पीकर के फैसले तक बागी सांसदों को वोटिंग की अनुमति दे सकता है। TMC यदि अयोग्यता याचिका दायर करती है, तो स्पीकर को इस पर निर्णय लेना होगा।

इस पूरे घटनाक्रम का असर आगामी मानसून सत्र में देखने को मिलेगा, जहां सरकार को अपने विधेयकों के लिए समर्थन जुटाने की आवश्यकता है।

FAQ

क्या TMC के बागी सांसदों का NCPI में विलय उन्हें अयोग्यता से बचा सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह विलय अयोग्यता से बचने का पूरी तरह सुरक्षित तरीका नहीं है, क्योंकि 10वीं अनुसूची के तहत विलय केवल मूल राजनीतिक दल द्वारा ही किया जा सकता है। हालांकि, स्पीकर के फैसले तक ये सांसद लोकसभा में वोटिंग कर सकते हैं।

NCPI क्या है और इसका TMC से क्या संबंध है?

NCPI (National Congress Party of India) पश्चिम बंगाल स्थित एक अल्पज्ञात राजनीतिक दल है। इसका TMC से कोई पूर्व संबंध नहीं है; बागी सांसदों ने इसे विलय के लिए चुना है।

इस विलय का लोकसभा में आगामी विधेयकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सरकार मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक ला सकती है, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। अप्रैल में सरकार इस बहुमत से चूक गई थी। बागी सांसदों का यह गुट सरकार को समर्थन दे सकता है, जिससे विधेयक पारित होने की संभावना बढ़ जाती है।

क्या TMC ने अब तक अयोग्यता याचिका दायर की है?

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC ने अब तक स्पीकर के कार्यालय में कोई अयोग्यता याचिका दायर नहीं की है।

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