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Tmc में बगावत: सुदीप बंद्योपाध्याय भी विद्रोही खेमे में, 22 सांसदों ने स्पीकर से मिलने का किया दावा

प्रमुख तथ्य तृणमूल कांग्रेस (TMC) में गहराते संकट के बीच ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी सुदीप बंद्योपाध्याय रविवार (14 जून, 2026) को विद्रोही सांसदों के खेमे में शामिल हो गए। विद्रोही सांसदों ने केंद्रीय मंत्री…

प्रमुख तथ्य

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में गहराते संकट के बीच ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी सुदीप बंद्योपाध्याय रविवार (14 जून, 2026) को विद्रोही सांसदों के खेमे में शामिल हो गए। विद्रोही सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की और सोमवार (15 जून) को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलकर 'असली TMC' संसदीय दल के रूप में मान्यता मांगने की योजना बनाई।

विस्तार से जानकारी

सुदीप बंद्योपाध्याय का रुख

सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि विद्रोही सांसदों और विधायकों की अपील से प्रभावित होकर उन्होंने उनके साथ बने रहने का फैसला किया। उन्होंने कहा, "अधिकांश सांसद और विधायक चाहते थे कि यह पहल सफल हो। वे ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में पार्टी को जारी रखना चाहते थे, जहां वह मुख्य सलाहकार और पार्टी नेता की भूमिका निभाएं। उनकी अपील ने मुझे सचमुच छू लिया। इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं उनके साथ रह सकता हूं।" हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी तक स्पीकर को सौंपे जाने वाले पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और वह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उपस्थिति में ही हस्ताक्षर करेंगे।

विद्रोही सांसदों की रणनीति

विद्रोही सांसदों ने भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक कर सोमवार की रणनीति तय की। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि दो और सांसद विद्रोही खेमे में शामिल होने वाले हैं, जिससे लोकसभा में उनकी संख्या 22 हो जाएगी। उन्होंने कहा, "हम सोमवार को स्पीकर से मिलेंगे और अलग गुट के रूप में मान्यता मांगेंगे।"

पार्टी में फेरबदल

बढ़ते संकट के बीच TMC ने संगठनात्मक फेरबदल किया। सायोनी घोष, माला रॉय और सुदीप बंद्योपाध्याय को प्रमुख पदों से हटा दिया गया। अर्नब बनर्जी को तृणमूल यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष, अलीफा अहमद को महिला विंग का अध्यक्ष और कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। सांसद सौगत रॉय को लोकसभा विंग का मुख्य सलाहकार बनाया गया।

प्रभाव और विश्लेषण

कानूनी पहलू

राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने कहा कि दलबदल विरोधी कानून के तहत एक ही चुनाव चिह्न पर जीते सांसदों का अलग गुट बनाना कानूनी नहीं है। उन्होंने कहा, "मूल शर्त यह है कि मूल पार्टी को किसी अन्य पार्टी में विलय करना होगा। संसद या विधानसभा में एक ही चिह्न पर जीते सदस्यों का अलग गुट बनाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।" उन्होंने चेतावनी दी कि विद्रोही सांसदों को नई पार्टी में विलय करना होगा या अयोग्यता का सामना करना पड़ेगा।

राजनीतिक प्रभाव

यह संकट TMC के लिए गंभीर है, खासकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद। विद्रोही सांसदों की संख्या 22 तक पहुंचने से पार्टी की लोकसभा में ताकत कम हो सकती है। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार पर भी इसका असर पड़ सकता है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • विद्रोही सांसदों का दावा है कि वे 'असली TMC' हैं और स्पीकर से मान्यता चाहते हैं।
  • पार्टी ने संगठनात्मक फेरबदल कर विद्रोहियों को हटाया है।
  • कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अलग गुट बनाना संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

विद्रोही सांसदों की मांग क्या है?

विद्रोही सांसद लोकसभा स्पीकर से 'असली TMC' संसदीय दल के रूप में मान्यता चाहते हैं, जिससे वे पार्टी के आधिकारिक प्रतिनिधि बन सकें।

क्या कानूनी रूप से अलग गुट बनाना संभव है?

राज्यसभा सांसद सागरिका घोष के अनुसार, दलबदल विरोधी कानून के तहत एक ही चुनाव चिह्न पर जीते सांसदों का अलग गुट बनाना कानूनी नहीं है। मूल पार्टी को किसी अन्य पार्टी में विलय करना होगा या सदस्यता खतरे में पड़ सकती है।

सुदीप बंद्योपाध्याय ने विद्रोही खेमे में शामिल होने का फैसला क्यों किया?

उन्होंने कहा कि अधिकांश सांसदों और विधायकों ने उनसे पार्टी में बने रहने की अपील की, जिससे वे प्रभावित हुए और विद्रोही खेमे के साथ बने रहने का निर्णय लिया।

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