Desh Duniya | NCPI

दसवीं अनुसूची की पहेली: तृणमूल सांसदों का विलय और सवाल

मुख्य तथ्य तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा की है। यह कदम दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) की व्याख्या…

मुख्य तथ्य

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा की है। यह कदम दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) की व्याख्या पर नए सवाल खड़े करता है।

पृष्ठभूमि: दलबदल विरोधी कानून का इतिहास

1960 और 1970 के दशक में विधायकों के बड़े पैमाने पर दलबदल ने कई राज्य सरकारों को अस्थिर कर दिया था। इसके समाधान के लिए 1985 में 52वें संविधान संशोधन के माध्यम से दसवीं अनुसूची जोड़ी गई। इसके तहत किसी सदस्य द्वारा स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने या पार्टी के निर्देशों के विरुद्ध मतदान करने पर अयोग्यता का प्रावधान है।

दसवीं अनुसूची में मूल रूप से दो अपवाद थे: (1) विधायक दल के एक-तिहाई सदस्यों का अलग समूह बनाना (पैराग्राफ 3), और (2) राजनीतिक दल का किसी अन्य दल में विलय, जिसे विधायक दल के दो-तिहाई सदस्यों की मंजूरी हो (पैराग्राफ 4)। 2003 में पैराग्राफ 3 को हटा दिया गया, जिससे दलबदल विरोधी कानून मजबूत हुआ।

हाल के उदाहरण और विवाद

पैराग्राफ 3 हटने के बाद भी, दो-तिहाई सदस्यों द्वारा 'व्यावहारिक रूप से' दलबदल कर मूल पार्टी होने का दावा करने के मामले सामने आए हैं। जून 2022 में शिवसेना और जुलाई 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मामले इसके उदाहरण हैं।

इसी तरह, दो-तिहाई से अधिक सदस्यों ने विलय का सहारा लिया है। सितंबर 2019 में राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सभी 6 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए। सितंबर 2022 में गोवा में 11 में से 8 कांग्रेस विधायकों ने भाजपा में विलय कर लिया, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने बरकरार रखा, हालांकि सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित है। अप्रैल 2026 में AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा में विलय कर लिया।

तृणमूल कांग्रेस का मामला

हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद, तृणमूल कांग्रेस के 80 में से लगभग 60 विधायकों ने रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग गुट बना लिया। पार्टी द्वारा निष्कासित किए जाने के बावजूद, रितब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी गई। अब, 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने NCPI में विलय का निर्णय लिया है। उनका दावा है कि वे विधायक दल के दो-तिहाई हैं, इसलिए दसवीं अनुसूची के तहत उन्हें अयोग्यता से छूट मिलनी चाहिए।

कानूनी पेचीदगियां

दसवीं अनुसूची के शाब्दिक अर्थ के अनुसार, केवल एक राजनीतिक दल का दूसरे दल में विलय ही अनुमत है, न कि विधायक दल के दो-तिहाई सदस्यों का किसी अन्य दल में शामिल होना। हालांकि, तृणमूल सांसदों और AAP के राज्यसभा सांसदों के मामले में ऐसा ही हुआ है। यह भी सवाल है कि क्या किसी 'मूल राजनीतिक दल' का विलय केवल उसी दल में हो सकता है जिसके पहले से सदन में सदस्य हों।

अयोग्यता का निर्णय स्पीकर या सभापति द्वारा किया जाता है, जिनसे निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है, लेकिन अक्सर वे सत्तारूढ़ पक्ष का समर्थन करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के के.एम. सिंह मामले में सिफारिश की थी कि संसद इस शक्ति को एक स्वतंत्र न्यायाधिकरण को हस्तांतरित करे।

आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट का एक स्पष्ट निर्णय विलय और अयोग्यता से जुड़ी अस्पष्टताओं को कम कर सकता है, लेकिन यह राजनीतिक दलों द्वारा दसवीं अनुसूची को दरकिनार करने के नए तरीकों को नहीं रोक सकता। कानून आयोग ने 1999 में सिफारिश की थी कि पैराग्राफ 4 को हटा दिया जाए, जिससे विलय के मामले में भी अयोग्यता लागू हो। इससे चुनावी जनादेश का सम्मान सुनिश्चित होगा।

FAQ

दसवीं अनुसूची क्या है?

दसवीं अनुसूची भारतीय संविधान में 1985 में जोड़ा गया एक प्रावधान है जो सांसदों और विधायकों को दलबदल से रोकता है। इसके तहत किसी सदस्य द्वारा स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने या पार्टी के खिलाफ मतदान करने पर अयोग्यता का प्रावधान है।

क्या दो-तिहाई सांसद मिलकर विलय कर सकते हैं?

दसवीं अनुसूची के अनुसार, विलय केवल एक राजनीतिक दल का दूसरे दल में हो सकता है, न कि दल के एक हिस्से का। दो-तिहाई सदस्यों द्वारा विलय की अनुमति नहीं है, हालांकि कुछ मामलों में ऐसा दावा किया गया है।

अयोग्यता का फैसला कौन करता है?

अयोग्यता का निर्णय सदन के अध्यक्ष या सभापति द्वारा किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस शक्ति को एक स्वतंत्र न्यायाधिकरण को हस्तांतरित करने की सिफारिश की है।

Follow us on Google News

Explore more

भारत के जलाशयों में 102 गीगावॉट फ्लोटिंग सोलर की क्षमता: nise रिपोर्ट

मुख्य तथ्य राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) की पहली व्यापक राष्ट्रीय मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, भारत के जलाशयों में लगभग 102 गीगावॉट…

More on Desh Duniya from Himachal Pradesh

केरल में खाद्यान्न घोटाला: 95.7 लाख राशन कार्ड धारकों के लिए आरक्षित अनाज कालाबाजारी में बेचा गया

प्रमुख तथ्य केरल में विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) ने एक राज्यव्यापी ऑपरेशन के तहत सब्सिडी वाले खाद्यान्न की बड़े पैमाने पर…

चीन को निर्यात में कीटनाशक अवशेषों की समस्या: मिर्च निर्यातक संघ ने उच्च जोखिम वाले रसायनों पर प्रतिबंध की मांग की

मुख्य तथ्य चिलीज़ एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, इंडिया ने एंध्र प्रदेश सरकार से मिर्च की खेती में उच्च जोखिम वाले कीटनाशकों पर तत्काल प्रतिबंध…

अभिजीत दीपके पर हमला करने वाले आरोपी रिहा, समर्थकों ने किया माल्यार्पण

प्रमुख तथ्य जयपुर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर हमला करने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने रिहा…