परिचय
तेलंगाना के एक 50 वर्षीय किसान बनोथ गौड़ (बदला हुआ नाम) की कहानी पैराक्वेट नामक कीटनाशक के खतरों को उजागर करती है। तीन साल पहले एक दुर्घटना में उन्होंने यह जहरीला रसायन पी लिया, जिसके बाद से वे सांस की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
कैसे हुआ हादसा?
गर्मी के एक दिन, गौड़ ने अपने रेफ्रिजरेटर से एक छोटी प्लास्टिक की बोतल निकाली, जिस पर एक लोकप्रिय जूस ब्रांड का लेबल लगा था। उन्होंने उसमें से घूंट भरा, लेकिन स्वाद सेब के मीठे और खट्टे स्वाद जैसा नहीं था; बल्कि वह फीका लगा। इसके तुरंत बाद वे उल्टी करने लगे। बाद में पता चला कि बोतल में पैराक्वेट था, जो एक अत्यधिक विषैला कीटनाशक है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
गौड़ बताते हैं, "मैं सामान्य दिखता हूं, लेकिन जब मैं सीढ़ियां चढ़ता हूं या पांच मिनट से अधिक चलता हूं तो मेरी सांस फूलने लगती है। डॉक्टर का कहना है कि मेरे फेफड़े प्रभावित हुए हैं।" पैराक्वेट विषाक्तता के कारण फेफड़ों के ऊतकों को स्थायी क्षति हो सकती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है।
पैराक्वेट का खतरा
पैराक्वेट दुनिया भर में प्रतिबंधित या प्रतिबंधित किए जाने वाले कीटनाशकों में से एक है। यह त्वचा के संपर्क में आने या सांस के माध्यम से भी शरीर में प्रवेश कर सकता है। भारत में इसके उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन कई राज्यों में इसके दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं।
क्या करें?
- कीटनाशकों को हमेशा मूल कंटेनर में रखें और उन पर स्पष्ट लेबल लगाएं।
- खाद्य पदार्थों या पेय पदार्थों के कंटेनरों में रसायन न रखें।
- यदि कोई व्यक्ति पैराक्वेट का सेवन कर ले, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पैराक्वेट क्या है?
पैराक्वेट एक अत्यधिक जहरीला कीटनाशक है जिसका उपयोग खरपतवार नियंत्रण के लिए किया जाता है। इसके सेवन से फेफड़े, लीवर और किडनी को गंभीर नुकसान हो सकता है।
बनोथ गौड़ के साथ क्या हुआ?
बनोथ गौड़ ने गलती से पैराक्वेट युक्त पेय पी लिया, जिससे उनके फेफड़े प्रभावित हुए और वे सीढ़ियां चढ़ने या पांच मिनट से अधिक चलने पर सांस फूलने की समस्या से जूझ रहे हैं।
क्या भारत में पैराक्वेट पर प्रतिबंध है?
भारत में पैराक्वेट के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसके दुरुपयोग और विषाक्तता के मामलों के कारण इसे नियंत्रित करने की मांग उठती रही है।