मुख्य तथ्य
तमिलनाडु के लोक निर्माण एवं खेल विकास मंत्री आदव अर्जुन ने चेय्यार के पास सिपकोट परिसर के प्रस्तावित फेज-3 विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण पर किसानों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में जिला कलेक्टर के नेतृत्व में एक तथ्य जांच दल गठित करने की घोषणा की गई।
विस्तार
यह बैठक मेलमा गांव में आयोजित हुई, जो प्रस्तावित परियोजना से प्रभावित गांवों में से एक है। मंत्री ने कहा, “तथ्य जांच दल परियोजना से संबंधित जमीनी हकीकत का अध्ययन करेगा और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा। किसानों के अधिकारों और आजीविका की हमेशा रक्षा की जाएगी।”
कलेक्टर वंदना गर्ग और पर्यावरण कार्यकर्ता अरुल अरुमुगम के साथ मंत्री ने औद्योगिक विकास और कृषि गतिविधियों के सह-अस्तित्व की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका को प्रभावित किए बिना परियोजना के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहित की जाएगी।
मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार परियोजना के खिलाफ विरोध करने वाले किसानों पर दर्ज मामलों पर सहानुभूति से विचार करेगी और उन्हें वापस लेने पर विचार किया जाएगा।
किसानों की मांग
किसानों ने मांग की कि सरकार को सिपकोट के फेज-1 और फेज-2 के लिए पहले अधिग्रहित 1,000 एकड़ से अधिक भूमि का उपयोग फेज-3 के विस्तार के लिए करना चाहिए। किसान बी. एसाकी ने कहा, “क्षेत्र की कृषि योग्य भूमि को औद्योगिक विकास के लिए अधिग्रहित नहीं किया जाना चाहिए। औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जांच की जानी चाहिए।”
परियोजना का विवरण
योजना के अनुसार, फेज-3 परियोजना के लिए अनाकावूर पंचायत संघ के नौ गांवों — मेलमा, नर्मपल्लम, कुरुम्बुर, तेतुरई, नेदुंगल, अथी, वाडा अलापिरंदन, वीरपक्कम और लियानीरकुंड्रम — से 3,174 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी। यह परियोजना एक दशक से अधिक समय से लंबित है।
मुआवजा
राजस्व अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने प्रति एकड़ 18 लाख रुपये मुआवजा तय किया है। अधिग्रहित भूमि पर पेड़, कुएं और भवनों जैसी संपत्तियों के लिए अलग मुआवजा दिया जाएगा।
FAQ
सिपकोट फेज-3 के लिए कितनी भूमि अधिग्रहित की जाएगी?
सिपकोट फेज-3 के लिए नौ गांवों से 3,174 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी।
किसानों को प्रति एकड़ कितना मुआवजा मिलेगा?
सरकार ने प्रति एकड़ 18 लाख रुपये मुआवजा तय किया है, जिसमें पेड़, कुएं और भवनों का अलग मुआवजा शामिल होगा।
क्या किसानों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे?
मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सहानुभूति से विचार करेगी और उन्हें वापस लेने पर विचार किया जाएगा।