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तमिलनाडु में बिजली की बढ़ती मांग के बीच बुनियादी ढांचे की कमी का आरोप

मुख्य तथ्य तमिलनाडु के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि पिछली DMK सरकार बिजली की बढ़ती मांग के बावजूद पर्याप्त बुनियादी ढांचा विकसित करने में विफल रही। उन्होंने…

मुख्य तथ्य

तमिलनाडु के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि पिछली DMK सरकार बिजली की बढ़ती मांग के बावजूद पर्याप्त बुनियादी ढांचा विकसित करने में विफल रही। उन्होंने कहा कि राज्य में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुरूप बुनियादी ढांचा नहीं बनाया गया।

विस्तार से जानकारी

कोयंबटूर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए सेंगोट्टैयन ने कहा कि बिजली क्षेत्र पर 7,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का दावा किया गया, लेकिन वास्तव में बुनियादी ढांचे के लिए केवल 627 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि चेन्नई में केवल 3,500 मेगावाट बिजली संभालने की क्षमता है, जबकि शहर वर्तमान में लगभग 5,000 मेगावाट की खपत कर रहा है। पिछली DMK सरकार ने AIADMK शासन के दौरान बनाए गए बुनियादी ढांचे पर निर्भर रहकर कोई नया विस्तार नहीं किया।

मेकेदातु बांध और कावेरी विवाद

मेकेदातु बांध मुद्दे पर सेंगोट्टैयन ने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस परियोजना का स्पष्ट विरोध किया है और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तमिलनाडु की स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री ने कर्नाटक से कावेरी जल छोड़ने का अनुरोध किया है।

मेट्टूर बांध का जल स्तर

मेट्टूर बांध खोलने के सवाल पर सेंगोट्टैयन ने कहा कि इंजीनियरों ने सरकार को बताया है कि बांध तभी खोला जा सकता है जब पर्याप्त पानी उपलब्ध हो, क्योंकि अभी जल प्रवाह कम है।

उपचुनाव पर अद्यतन

प्रस्तावित उपचुनाव के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा कार्यक्रम घोषित होने तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। पार्टी अध्यक्ष चुनाव अधिसूचना के बाद उम्मीदवारों पर फैसला लेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • तमिलनाडु में बिजली की खपत कितनी है? चेन्नई में वर्तमान में लगभग 5,000 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है, जबकि बुनियादी ढांचा केवल 3,500 मेगावाट का है।
  • मेकेदातु बांध पर तमिलनाडु सरकार का क्या रुख है? मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस परियोजना का विरोध किया है और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तमिलनाडु की स्थिति स्पष्ट की है।
  • मेट्टूर बांध कब खोला जाएगा? अभी तक बांध खोलने का निर्णय नहीं लिया गया है क्योंकि पर्याप्त पानी नहीं है। इंजीनियरों ने बताया कि जब पर्याप्त पानी होगा तभी बांध खोला जाएगा।
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