Desh Duniya | Cauvery water dispute

तमिलनाडु ने मेकेदातु परियोजना पर नए न्यायाधिकरण की मांग की

मुख्य तथ्य तमिलनाडु सरकार ने कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना को ‘अस्वीकार्य’ और ‘अनुचित’ बताते हुए केंद्र सरकार से एक नए जल विवाद न्यायाधिकरण के गठन की मांग की है। राज्य सरकार का तर्क है…

मुख्य तथ्य

तमिलनाडु सरकार ने कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना को 'अस्वीकार्य' और 'अनुचित' बताते हुए केंद्र सरकार से एक नए जल विवाद न्यायाधिकरण के गठन की मांग की है। राज्य सरकार का तर्क है कि यह परियोजना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) के 2007 के अंतिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के दायरे से बाहर है।

विस्तार से जानकारी

तमिलनाडु सरकार ने मार्च में केंद्र को भेजे अपने पत्र में कहा कि मेकेदातु परियोजना का उल्लेख CWDT द्वारा कर्नाटक में सिंचाई के लिए विचार किए गए 28 परियोजनाओं की सूची में नहीं है। ये 28 परियोजनाएं लगभग 18.85 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई के लिए थीं। तमिलनाडु का कहना है कि CWDT और सुप्रीम कोर्ट ने केवल उन्हीं परियोजनाओं पर विचार किया जो अनुमत उपयोग के लिए आवश्यक थीं।

तमिलनाडु के अनुसार, CWDT के फैसले में सूचीबद्ध परियोजनाओं के अलावा कोई नई परियोजना नहीं ली जा सकती। कर्नाटक द्वारा मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाना अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 की धारा 2(c) और धारा 3 के तहत जल विवाद की श्रेणी में आता है।

प्रभाव और कानूनी पहलू

तमिलनाडु ने तर्क दिया कि कर्नाटक का अपने क्षेत्र में उत्पन्न जल पर 'विशेष अधिकार' का दावा और नए जलाशय के निर्माण का प्रस्ताव 'स्पष्ट रूप से अनुचित' है। तमिलनाडु ने यह भी कहा कि कर्नाटक को ऐसी कोई कार्रवाई करने की अनुमति नहीं है जो कबीनी और बिलिगुंडुलु के बीच के मध्यवर्ती क्षेत्र से प्रवाह को प्रभावित करे। इस क्षेत्र का योगदान औसतन 80 TMC आंका गया है, जो तमिलनाडु को दिए जाने वाले पानी का एक हिस्सा है।

एक जल विशेषज्ञ के अनुसार, यदि केंद्र सरकार को लगता है कि जल विवाद बातचीत से हल नहीं किया जा सकता, तो उसे शिकायत मिलने की तारीख से एक वर्ष के भीतर एक न्यायाधिकरण का गठन करना होगा।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • तमिलनाडु ने केंद्र से मेकेदातु परियोजना पर कोई भी कार्रवाई न करने का अनुरोध किया है।
  • यह विवाद कावेरी जल बंटवारे के लंबे इतिहास का हिस्सा है।
  • न्यायाधिकरण के गठन से इस विवाद का समाधान हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेकेदातु परियोजना क्या है?

मेकेदातु परियोजना कर्नाटक के रामनगर जिले में कावेरी नदी पर प्रस्तावित एक बहुउद्देशीय जलाशय परियोजना है, जिसका उद्देश्य पेयजल और बिजली उत्पादन है।

तमिलनाडु मेकेदातु परियोजना का विरोध क्यों कर रहा है?

तमिलनाडु का कहना है कि यह परियोजना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के 2007 के अंतिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के दायरे से बाहर है, और इससे तमिलनाडु को आवंटित पानी प्रभावित होगा।

तमिलनाडु ने क्या कानूनी कदम उठाया है?

तमिलनाडु ने केंद्र सरकार को शिकायत भेजकर अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत एक नए न्यायाधिकरण के गठन की मांग की है।

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