मुख्य तथ्य
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 जुलाई, 2026) को दिल्ली, गुरुग्राम और लखनऊ में अवैध निर्माणों और आग सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि नागरिक अधिकारियों द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हाल की आग की घटनाएं
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने दिल्ली के हौज रानी और लखनऊ में हाल ही में हुई आग की घटनाओं का संज्ञान लिया। वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि हौज रानी में फ्लोरिश स्टे बीएंडबी में लगी आग में 23 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकतर नाइजीरिया, मोजाम्बिक, सोमालिया, लाइबेरिया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के नागरिक थे। ये लोग मैक्स और पीएसआरआई अस्पतालों के पास रुके हुए थे, जहां उनके रिश्तेदार इलाज करा रहे थे। 50 से अधिक लोगों को बचाया गया।
लखनऊ में 22 जून को हुई आग की घटना में 15 लोगों की जान गई, जिनमें अधिकतर 16 से 25 वर्ष के छात्र थे।
अदालत की चिंता और निर्देश
पीठ ने विशेष रूप से दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के उस आचरण पर चिंता जताई जिसमें उसने 2024 में जारी अदालती निर्देशों और 20 मई के विशिष्ट निर्देशों का पालन नहीं किया। अदालत ने एमसीडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.डी. संजय से कहा कि वे 4 अगस्त तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें।
अदालत ने चेतावनी दी कि यदि जमीनी स्तर पर अवैध निर्माणों की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो नगर निकायों के शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
गुरुग्राम की स्थिति
अदालत ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि गुरुग्राम में 93% इमारतें आग सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करतीं। पीठ ने गुरुग्राम नगर निगम के कार्यकारी प्रमुख को अगली सुनवाई में उपस्थित होने और कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
FAQ
सुप्रीम कोर्ट ने किन शहरों में अवैध निर्माणों पर चिंता जताई?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, गुरुग्राम और लखनऊ में अवैध निर्माणों और आग सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर चिंता व्यक्त की।
हाल की आग की घटनाओं में कितने लोग मारे गए?
दिल्ली के हौज रानी में 23 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकतर विदेशी नागरिक थे, जबकि लखनऊ की घटना में 15 लोगों की जान गई।
अदालत ने नगर निगमों को क्या चेतावनी दी?
अदालत ने कहा कि यदि अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।