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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 360 से अधिक मदरसा कर्मचारियों की नियमितीकरण याचिका खारिज की

प्रमुख तथ्य सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई, 2026) को पश्चिम बंगाल के 360 से अधिक मदरसा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने मान्यता प्राप्त मदरसों में नियमित…

प्रमुख तथ्य

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई, 2026) को पश्चिम बंगाल के 360 से अधिक मदरसा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने मान्यता प्राप्त मदरसों में नियमित नियुक्ति और राज्य वेतन की मांग की थी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कोई भी याचिकाकर्ता अपने मामले के गुण-दोष के बारे में न्यायालय को समझाने में सफल नहीं हो सका।

मामले का विवरण

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि उनकी नियुक्ति पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम, 2008 के तहत हुई थी, लेकिन बाद में इस अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया और कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस फैसले की पुष्टि की। इसके बावजूद, याचिकाकर्ताओं ने अनुदान-सहायता योजना के तहत नियमितीकरण और वेतन की मांग की।

न्यायालय का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे कि जिन मदरसों में वे नियुक्त थे, वे वैध रूप से मान्यता प्राप्त थे या उनका प्रबंधन वैध प्रबंधन समितियों द्वारा किया जा रहा था। इस आधार पर, पीठ ने सभी 40 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया।

प्रभाव और आगे की राह

इस फैसले से पश्चिम बंगाल के मदरसा कर्मचारियों के नियमितीकरण के प्रयासों को झटका लगा है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के पास अन्य कानूनी विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • सुप्रीम कोर्ट ने कितने याचिकाकर्ताओं की याचिका खारिज की? सुप्रीम कोर्ट ने 361 याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर 40 से अधिक याचिकाएं खारिज कर दीं।
  • याचिकाकर्ता क्या मांग कर रहे थे? याचिकाकर्ता मान्यता प्राप्त मदरसों में नियमित नियुक्ति और राज्य वेतन की मांग कर रहे थे।
  • इस मामले में पृष्ठभूमि क्या है? पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम, 2008 को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इसकी पुष्टि की थी, जिसके बाद ये याचिकाएं दायर की गईं।
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