मुख्य तथ्य
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश से एक याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें उनके बिना विधायक या एमएलसी बने मंत्री पद पर बने रहने को चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ECI, प्रकाश, बिहार सरकार और मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया। याचिका बिहार निवासी राकेश कुमार सिंह ने अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है।
मामले का विवरण
याचिका में आरोप लगाया गया है कि दीपक प्रकाश की 7 मई 2026 को पुनर्नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 164(4) के विपरीत है। यह प्रावधान किसी गैर-विधायक को छह महीने तक मंत्री रहने की अनुमति देता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि इसका उपयोग चुनावी जनादेश से बचने के लिए नहीं किया जा सकता। याचिका में कहा गया है कि प्रकाश ने अपने पहले कार्यकाल में लगभग 4 महीने और 26 दिन बिता लिए थे, और केवल एक महीने से अधिक का समय बचा था। इस्तीफा देकर और पुनर्नियुक्त होकर संवैधानिक सीमा को दरकिनार करने का प्रयास किया गया है।
प्रभाव और कानूनी पहलू
यह मामला लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को प्रभावित करता है। यदि याचिका स्वीकार होती है, तो यह स्थापित होगा कि अनुच्छेद 164(4) के तहत छह महीने की अवधि को बार-बार इस्तीफा और पुनर्नियुक्ति के जरिए नहीं बढ़ाया जा सकता। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 164(4) की व्याख्या को स्पष्ट कर सकती है।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भविष्य में गैर-विधायक मंत्रियों की नियुक्ति के लिए मिसाल बनेगा।
- यह मामला बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में यह पहली बार नहीं है कि किसी गैर-विधायक को मंत्री बनाया गया हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Article 164(4) क्या कहता है?
Article 164(4) के तहत कोई व्यक्ति जो विधानमंडल का सदस्य नहीं है, उसे मंत्री नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन केवल लगातार छह महीने के लिए। यदि वह इस अवधि में निर्वाचित नहीं होता, तो वह मंत्री पद से हट जाता है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिका में क्वो वारंटो रिट जारी करने की मांग की गई है, जिससे मंत्री को यह बताने का आदेश हो कि वह किस संवैधानिक अधिकार के तहत पद पर बने हुए हैं। साथ ही उनकी पुनर्नियुक्ति को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।
दीपक प्रकाश को कब मंत्री बनाया गया?
दीपक प्रकाश को पहली बार 20 नवंबर 2025 को बिहार का पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया था, जब वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे। 7 मई 2026 को उन्हें फिर से उसी पद पर नियुक्त किया गया।
अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होने की संभावना है।
स्रोत: www.hindustantimes.com