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सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में rte अधिनियम के गैर-कार्यान्वयन पर केंद्र और राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

मुख्य तथ्य सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और पंजाब सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें राज्य में बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के गैर-कार्यान्वयन…

मुख्य तथ्य

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और पंजाब सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें राज्य में बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के गैर-कार्यान्वयन का आरोप लगाया गया है। याचिका में केंद्र से पंजाब सरकार द्वारा अधिनियम के प्रावधानों, विशेष रूप से निजी स्कूलों में कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के कम से कम 25% बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश देने से संबंधित प्रावधान, के प्रभावी और निरंतर अनुपालन को सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

विस्तृत जानकारी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए याचिकाकर्ता से पूछा, "क्या आप कुछ ऐसे स्कूलों की पहचान कर पाए हैं जो ऐसा नहीं कर रहे हैं?" याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पंजाब में पिछले 15 वर्षों से अधिनियम के प्रावधानों को लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने 2012 के शीर्ष अदालत के फैसले का उल्लेख किया जिसमें RTE अधिनियम की वैधता को बरकरार रखा गया था।

पीठ ने राज्य द्वारा पहले दायर एक हलफनामे का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के 450 से अधिक छात्रों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिया गया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह संख्या लगभग 50,000 होनी चाहिए, क्योंकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रवेश स्तर पर हर साल लगभग दो लाख छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।

पीठ ने कहा, "हम नोटिस जारी कर रहे हैं।" शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता कम से कम एक जिले में सर्वेक्षण करे ताकि पता चल सके कि कितने निजी स्कूल हैं और उनमें से कितने अधिनियम के प्रावधानों को लागू नहीं कर रहे हैं। जब याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने पिछले साल इस मुद्दे पर RTI दायर किया था, तो पीठ ने टिप्पणी की कि RTI के साथ समस्या यह है कि अधिकारी पूछे गए प्रश्नों की प्रकृति के अनुसार जवाब देते हैं।

प्रभाव और आगे की राह

याचिका में केंद्र से पंजाब में अधिनियम की धारा 12 के अनुपालन की निगरानी और सुरक्षा के लिए एक पारदर्शी, समयबद्ध और सत्यापन योग्य तंत्र स्थापित करने का निर्देश देने की मांग की गई है, जिसमें जनता के लिए सुलभ डैशबोर्ड शामिल हों। धारा 12 मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के लिए स्कूल की जिम्मेदारी की सीमा से संबंधित है। इस धारा के अनुसार, एक स्कूल कक्षा 1 में उस कक्षा की कम से कम 25% क्षमता तक, पड़ोस में रहने वाले कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के बच्चों को प्रवेश देगा और उन्हें पूरा होने तक मुफ्त और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करेगा।

याचिका में केंद्र से पंजाब में अधिनियम के प्रावधानों को संचालित करने के लिए एक पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी कार्यान्वयन तंत्र सुनिश्चित करने का भी निर्देश मांगा गया है, जिसमें उपलब्ध सीटों का निर्धारण और प्रकाशन, प्रवेश कार्यक्रम का प्रकाशन, सुलभ आवेदन प्रक्रिया, प्रतिपूर्ति ढांचा और गैर-अनुपालन के लिए वैधानिक परिणामों का प्रवर्तन शामिल है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अदालत इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
  • याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि पंजाब में RTE अधिनियम का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे कमजोर वर्गों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
  • अदालत ने याचिकाकर्ता को एक जिले में सर्वेक्षण करने का सुझाव दिया है, जिससे वास्तविक स्थिति का पता चल सके।

FAQ

RTE अधिनियम की धारा 12 क्या कहती है?

धारा 12 के अनुसार, निजी स्कूलों को कक्षा 1 में कम से कम 25% सीटें कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं, और उन्हें मुफ्त शिक्षा प्रदान करनी होती है।

याचिकाकर्ता ने क्या आरोप लगाया है?

याचिकाकर्ता का आरोप है कि पंजाब में पिछले 15 वर्षों से RTE अधिनियम के प्रावधानों को लागू नहीं किया जा रहा है, और केवल 450 बच्चों को प्रवेश दिया गया है जबकि लगभग 50,000 को प्रवेश मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या सुझाव दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुझाव दिया कि वह कम से कम एक जिले में सर्वेक्षण करे ताकि पता चल सके कि कितने निजी स्कूल RTE के प्रावधानों को लागू नहीं कर रहे हैं।

स्रोत: www.hindustantimes.com

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