मुख्य तथ्य
मद्रास हाईकोर्ट की पांच सदस्यीय बड़ी पीठ ने शुक्रवार (19 जून, 2026) को उन दोषियों को छुट्टी देने के मुद्दे पर सुनवाई की, जिनकी अपील सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में लंबित है। पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
विस्तृत जानकारी
मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन, ए.डी. जगदीश चंदिरा, एम. निर्मल कुमार और सुंदर मोहन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। यह मामला न्यायमूर्ति एन. सतीश कुमार और एम. जोथिरमन की खंडपीठ द्वारा 11 नवंबर, 2025 को संदर्भित किया गया था, क्योंकि दो पूर्ण पीठों के फैसलों में विरोधाभास था।
वरिष्ठ अधिवक्ता अबुधु कुमार राजारत्नम ने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस मुद्दे पर सुनवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल, 2024 को कई राज्यों को नोटिस जारी किया था, लेकिन मामला अभी भी लंबित है।
प्रभाव
इस फैसले का तमिलनाडु के कई दोषियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा, जो छुट्टी की मांग कर रहे हैं। अगर हाईकोर्ट छुट्टी देने का पक्ष लेता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद, मद्रास हाईकोर्ट ने अपनी सुनवाई जारी रखी है।
- राजारत्नम ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट फैसला नहीं करता, तमिलनाडु में दोषियों को छुट्टी दी जा सकती है।
- बड़ी पीठ ने जल्द ही विस्तृत आदेश पारित करने का वादा किया है।
FAQ
दोषियों को छुट्टी देने का नियम क्या है?
तमिलनाडु सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस रूल्स, 1982 के तहत दोषियों को साधारण या आपातकालीन छुट्टी दी जा सकती है, लेकिन यह विवाद है कि क्या यह छुट्टी उन दोषियों को दी जा सकती है जिनकी अपील लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की स्थिति क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल 2024 को इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू की थी और कई राज्यों को नोटिस जारी किया था, लेकिन मामला अभी भी लंबित है।
मद्रास हाईकोर्ट की बड़ी पीठ ने क्या कहा?
बड़ी पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है और जल्द ही विस्तृत आदेश पारित करेगी।