Desh Duniya | आर्थिक मूल्य

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: गृहिणियों के अवैतनिक कार्य का आर्थिक मूल्य तय, ₹30,000 प्रति माह न्यूनतम आय मानी जाएगी

प्रमुख तथ्य सुप्रीम कोर्ट ने 11 जून को एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि गृहिणियों द्वारा किया जाने वाला अवैतनिक घरेलू कार्य मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में आर्थिक मूल्य रखता है। कोर्ट ने इसके लिए…

प्रमुख तथ्य

सुप्रीम कोर्ट ने 11 जून को एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि गृहिणियों द्वारा किया जाने वाला अवैतनिक घरेलू कार्य मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में आर्थिक मूल्य रखता है। कोर्ट ने इसके लिए ₹30,000 प्रति माह न्यूनतम आय तय की और इसे 'घरेलू देखभाल की हानि' (loss of domestic care) नामक एक अलग मुआवजा शीर्षक के तहत शामिल किया। यह राशि हर तीन साल में 10% बढ़ाई जाएगी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह फैसला पंजाब के एक मोटर दुर्घटना मामले से जुड़ा है। नवंबर 2001 में रेशमा नामक महिला की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनके पति और तीन बच्चों ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में मुआवजा मांगा। दिसंबर 2003 में अधिकरण ने ₹2.42 लाख का मुआवजा दिया। परिवार ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपील की, जिसने दिसंबर 2024 में मुआवजा बढ़ाकर ₹8.43 लाख किया, जिसमें 7.5% ब्याज शामिल था। इससे असंतुष्ट परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने गृहिणियों को 'राष्ट्र निर्माता' (nation builders) बताते हुए कहा कि उनके घरेलू कार्य का आर्थिक मूल्यांकन होना चाहिए। कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर ₹62.78 लाख कर दिया, जिसमें घरेलू देखभाल, मातृ देखभाल, वैवाहिक साथ और अन्य आश्रितों की देखभाल शामिल है।

मुआवजा गणना के नियम

  • गृहिणी की मृत्यु पर 'घरेलू देखभाल की हानि' के तहत ₹30,000 प्रति माह अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा।
  • यह राशि हर तीन साल में 10% बढ़ेगी।
  • यदि गृहिणी नौकरीपेशा भी है, तो यह राशि उसकी साबित आय के अतिरिक्त दी जाएगी।

प्रभाव और महत्व

यह फैसला गृहिणियों के आर्थिक योगदान को मान्यता देता है, जिसे अक्सर जीडीपी जैसे पारंपरिक आर्थिक संकेतकों में नहीं गिना जाता। कोर्ट ने कहा कि गृहिणियां भारत की 'मानव पूंजी' (human capital) की नींव हैं, जिन पर 'उच्च उड़ान भरने वाले व्यवसायी, सफल राजनेता, शीर्ष कलाकार और मांगल वकील' खड़े होते हैं।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

यह फैसला मोटर दुर्घटना मुआवजा दावों में गृहिणियों के योगदान को उचित मूल्य देगा। हिमाचल प्रदेश के निवासी भी इससे लाभान्वित हो सकते हैं। यदि आपके परिवार में किसी गृहिणी की मोटर दुर्घटना में मृत्यु होती है, तो मुआवजा दावे में इस फैसले का हवाला दिया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों के लिए कितनी न्यूनतम आय तय की है?

सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों के अवैतनिक घरेलू कार्य के लिए ₹30,000 प्रति माह न्यूनतम आय तय की है।

क्या यह राशि हर तीन साल में बढ़ेगी?

हां, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस राशि में हर तीन साल में 10% की वृद्धि की जाएगी।

यह फैसला किस मामले में आया?

यह फैसला पंजाब के एक मोटर दुर्घटना मामले में आया, जिसमें रेशमा नामक महिला की मौत हुई थी। उनके परिवार को शुरू में ₹2.42 लाख मिले थे, जिसे बढ़ाकर अब ₹62.78 लाख किया गया।

क्या यह फैसला केवल गृहिणियों पर लागू होता है?

यह फैसला उन गृहिणियों पर लागू होता है जो बिना वेतन के घरेलू कार्य करती हैं। यदि वे नौकरी भी करती हैं, तो यह राशि उनकी साबित आय के अतिरिक्त दी जाएगी।

स्रोत: www.thehindu.com

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