मुख्य तथ्य
सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें हवाई किराए में 'अनियंत्रित उतार-चढ़ाव' और एयरलाइंस द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों पर नियामक दिशानिर्देशों की मांग की गई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी।
याचिका का विवरण
याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने दायर की है, जिसमें एक स्वतंत्र और मजबूत नियामक की स्थापना की मांग की गई है जो पारदर्शिता और यात्री संरक्षण सुनिश्चित करे। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में किसी भी प्राधिकरण के पास हवाई किराए या अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा या सीमा तय करने की शक्ति नहीं है, जिससे एयरलाइंस छिपे हुए शुल्कों और अप्रत्याशित मूल्य निर्धारण के माध्यम से उपभोक्ताओं का शोषण कर रही हैं।
अदालत की पिछली टिप्पणियां
15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हवाई किराए में कुछ तर्कसंगतता होनी चाहिए और केंद्र सरकार को यात्रियों को राहत प्रदान करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि एक ही दिन एक ही सेक्टर में एक एयरलाइन अलग किराया वसूलती है जबकि दूसरी अलग। 19 जनवरी 2026 को अदालत ने त्योहारों के दौरान किराए में अत्यधिक वृद्धि को 'शोषण' करार दिया था और केंद्र व नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से जवाब मांगा था।
सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने समस्या से इनकार नहीं किया है, लेकिन कहा है कि जनवरी 2025 में भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 लागू हो गया है और संबंधित नियम परामर्श प्रक्रिया में हैं। याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि 1937 के विमान अधिनियम के तहत पहले से नियम मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन नहीं किया जा रहा।
याचिका में उठाए गए मुद्दे
- सभी निजी एयरलाइंस ने बिना किसी विश्वसनीय औचित्य के इकोनॉमी क्लास के यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज भत्ता 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दिया है, जिससे पहले टिकट सेवा का हिस्सा रही चीज को आय का नया स्रोत बना दिया गया है।
- नई नीति के तहत केवल एक बैग की अनुमति है और जो यात्री चेक-इन बैगेज का उपयोग नहीं करते, उन्हें कोई छूट, मुआवजा या लाभ नहीं दिया जाता, जो मनमाना और भेदभावपूर्ण है।
- एयरलाइंस का अनियमित, अपारदर्शी और शोषणकारी व्यवहार, जिसमें मनमाना किराया वृद्धि, सेवाओं में एकतरफा कटौती, जमीनी स्तर पर शिकायत निवारण का अभाव और अनुचित गतिशील मूल्य निर्धारण एल्गोरिदम शामिल हैं, नागरिकों के समानता, आवागमन की स्वतंत्रता और गरिमा के साथ जीवन के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
- राज्य द्वारा किराया एल्गोरिदम, रद्दीकरण नीतियों, सेवा निरंतरता और शिकायत तंत्र को विनियमित करने में निष्क्रियता संवैधानिक कर्तव्य का परित्याग है और तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
आगे की कार्यवाही
सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को केंद्र और अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। अब 13 जुलाई 2026 को इस मामले की सुनवाई होगी। याचिका में कहा गया है कि एयरलाइंस को मांग के आधार पर कीमतें बढ़ाने से रोकने वाला कोई नियम नहीं है और आवश्यक सेवाओं के तहत ऐसी स्वतंत्रता देना अनुचित है।
FAQ
सुप्रीम कोर्ट में किस याचिका पर सुनवाई होगी?
सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सुनवाई होगी, जिसमें हवाई किराए में अनियंत्रित उतार-चढ़ाव और एयरलाइंस की मनमानी पर नियामक दिशानिर्देशों की मांग की गई है।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में कहा गया है कि एयरलाइंस बिना किसी औचित्य के किराए बढ़ाती हैं, चेक-इन बैगेज भत्ता घटाकर 15 किलो कर दिया है, और कोई रिफंड या मुआवजा नहीं देतीं। इसे शोषण और मनमाना बताया गया है।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार ने कहा है कि भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 लागू हो चुका है और नियम बनाए जा रहे हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किराए में तर्कसंगतता होनी चाहिए।