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सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को 80 वर्षीय मां और दृष्टिबाधित बेटे के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

प्रमुख तथ्य सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को एक वृद्ध मां और उसके दृष्टिबाधित बेटे को सभी पात्र सामाजिक सुरक्षा लाभ और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया है। यह आदेश एक स्वतः संज्ञान…

प्रमुख तथ्य

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को एक वृद्ध मां और उसके दृष्टिबाधित बेटे को सभी पात्र सामाजिक सुरक्षा लाभ और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया है। यह आदेश एक स्वतः संज्ञान मामले में आया, जिसमें अदालत ने मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि ये दोनों अत्यधिक गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं।

विस्तार से जानकारी

मुख्य न्यायाधीश (CJI) और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 15 जून 2026 को इस मामले को पंजीकृत किया। पीठ ने कहा कि उसकी चिंता केवल यह नहीं है कि कल्याणकारी योजनाएं कागजों पर मौजूद हैं, बल्कि यह है कि क्या मां और बेटा वास्तव में इन योजनाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।

पीठ ने कहा, "हम केवल जपा भुए, जो जन्म से अंधे हैं, और उनकी 80 वर्षीय मां श्रीमती राधिका भुए के भरण-पोषण और सम्मानजनक जीवन से चिंतित हैं... ओडिशा राज्य और उसके अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे श्रीमती राधिका भुए और उनके बेटे जपा भुए को अगले आदेश तक सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएं।"

सरकार का पक्ष और कोर्ट का रुख

16 जून 2026 को ओडिशा सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता मिथु जैन ने पीठ को बताया कि मां और बेटे को एक आवास इकाई आवंटित की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि श्रीमती भुए को 3,500 रुपये प्रति माह वृद्धावस्था पेंशन और उनके बेटे को 3,500 रुपये प्रति माह विकलांगता पेंशन मिल रही है। परिवार को एक सरकारी कल्याण योजना के तहत मुफ्त चावल भी प्रदान किया जाता है।

हालांकि, पीठ ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को यह सत्यापित करने का निर्देश दिया कि क्या वास्तव में आवास इकाई आवंटित की गई है। यदि ऐसा नहीं हुआ है, तो सरकार को बिना देरी के यह सुविधा सुनिश्चित करनी होगी।

पीठ ने संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव को उसी दिन मां और बेटे से मिलने और उनसे बातचीत करने का निर्देश दिया। यदि उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है, तो DLSA मुख्य चिकित्सा अधिकारी के साथ समन्वय करेगा।

प्रभाव और आगे की कार्रवाई

पीठ ने राज्य सरकार को जपा भुए को पैरा-लीगल वालंटियर के रूप में शामिल करने का भी निर्देश दिया, ताकि उन्हें आजीविका का स्रोत मिल सके और वे अन्य दिव्यांग व्यक्तियों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने में मदद कर सकें। पीठ ने कहा, "ऐसी नियुक्ति पर, जपा भुए को बिना किसी रुकावट के मानदेय दिया जाएगा, और यह मानदेय ओडिशा राज्य द्वारा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होगा।"

कोर्ट ने राज्य सरकार को एक अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें मां और बेटे को दिए गए सामाजिक सुरक्षा लाभों का विवरण होगा। इसमें यह बताया जाएगा कि क्या श्रीमती भुए को वृद्धावस्था पेंशन मिल रही है, पेंशन की राशि क्या है, और क्या सभी लाभ बकाया सहित वितरित किए गए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें कोर्ट आदेशों के अनुपालन की समीक्षा करेगा।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

यह मामला दर्शाता है कि सुप्रीम कोर्ट सबसे कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए कितना संवेदनशील है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में हस्तक्षेप किया? सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के सुबरनपुर जिले के बगदिया गांव में रहने वाली 80 वर्षीय राधिका भुए और उनके दृष्टिबाधित बेटे जपा भुए के कल्याण के लिए स्वतः संज्ञान लेते हुए हस्तक्षेप किया।
  • कोर्ट ने ओडिशा सरकार को क्या निर्देश दिए? कोर्ट ने ओडिशा सरकार को मां और बेटे को सभी पात्र सामाजिक सुरक्षा लाभ और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
  • जपा भुए को पैरा-लीगल वालंटियर के रूप में क्यों शामिल किया गया? कोर्ट ने जपा भुए को पैरा-लीगल वालंटियर के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया ताकि उन्हें आजीविका का स्रोत मिल सके और वे अन्य दिव्यांग व्यक्तियों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में मदद कर सकें।
  • अगली सुनवाई कब होगी? मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें कोर्ट आदेशों के अनुपालन की समीक्षा करेगा।

स्रोत: www.thehindu.com

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