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सुप्रीम कोर्ट ने साइबर ठगों को ‘परजीवी’ बताते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी

मुख्य तथ्य सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (17 जून, 2026) को साइबर फ्रॉड के आरोपी मनोज कुमार सिंह की याचिका खारिज करते हुए साइबर ठगों को ‘परजीवी’ बताया। कोर्ट ने कहा कि समाज हित में ऐसे…

मुख्य तथ्य

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (17 जून, 2026) को साइबर फ्रॉड के आरोपी मनोज कुमार सिंह की याचिका खारिज करते हुए साइबर ठगों को 'परजीवी' बताया। कोर्ट ने कहा कि समाज हित में ऐसे अपराधियों को जेल में रखना जरूरी है।

विस्तार से जानकारी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मनोज कुमार सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कई मामलों को एक साथ जोड़ने और जमानत की मांग की थी। पीठ ने कहा, 'आप लोग परजीवी हैं... आप निवेशकों से पैसे लेते हैं और उन्हें ठगते हैं। हमें आपके साथ सख्ती बरतनी होगी। समाज हित तभी है जब आप जेल में हैं, बाहर नहीं।'

मनोज कुमार सिंह के खिलाफ बिहार, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर में कई साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हैं। जम्मू पुलिस और तमिलनाडु के तिरुपुर पुलिस ने इस साल उनके खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए।

प्रभाव और आगे की कार्रवाई

कोर्ट ने साइबर फ्रॉड के पैटर्न पर चिंता जताई कि आरोपी एक राज्य में अपराध कर दूसरे राज्य में चले जाते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'आप कठोर अपराधी हैं जिनके पीड़ित पूरे देश में फैले हैं। आप तमिलनाडु में किसी को ठगते हैं और फिर जम्मू चले जाते हैं।'

पीठ ने मनोज कुमार सिंह को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि वह संबंधित उच्च न्यायालय में जा सकते हैं।

पृष्ठभूमि: डिजिटल अरेस्ट स्कैम

पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम पर संज्ञान लिया था। यह एक संगठित साइबर फ्रॉड है जिसमें अपराधी सीबीआई, ईडी या न्यायिक अधिकारी बनकर फर्जी कोर्ट आदेश से पैसे ऐंठते हैं। हरियाणा के अंबाला की एक बुजुर्ग महिला ने पत्र लिखकर बताया था कि उनसे और उनके पति से 1.5 करोड़ रुपये की ठगी हुई। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को मजबूत करने का आश्वासन दिया था और कई राज्यों ने बड़े मामले सीबीआई को सौंपे। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

  • साइबर फ्रॉड से बचने के लिए किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर तुरंत विश्वास न करें।
  • अगर कोई सरकारी अधिकारी बनकर पैसे मांगे, तो तुरंत पुलिस या साइबर सेल को सूचित करें।
  • डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम में न फंसें; कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी नहीं करती।

FAQ

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर ठगों को क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर ठगों को 'परजीवी' बताते हुए कहा कि वे निवेशकों से पैसे लेकर ठगी करते हैं और समाज हित में उन्हें जेल में रहना चाहिए।

मनोज कुमार सिंह पर कितने मामले दर्ज हैं?

मनोज कुमार सिंह के खिलाफ बिहार, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर में कई साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हैं।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है?

डिजिटल अरेस्ट एक साइबर फ्रॉड है जिसमें अपराधी कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर फर्जी कोर्ट आदेश से पैसे ऐंठते हैं।

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