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सुप्रीम कोर्ट ने साइबर ठगों को ‘परजीवी’ बताया, जमानत याचिका खारिज

मुख्य तथ्य सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को साइबर धोखाधड़ी के आरोपियों को ‘परजीवी’ करार देते हुए कहा कि समाज के हित में यही बेहतर है कि वे जेल में रहें। अदालत ने एक ऐसे आरोपी…

मुख्य तथ्य

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को साइबर धोखाधड़ी के आरोपियों को 'परजीवी' करार देते हुए कहा कि समाज के हित में यही बेहतर है कि वे जेल में रहें। अदालत ने एक ऐसे आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसने कई राज्यों में दर्ज मामलों को एक साथ जोड़ने और जमानत की मांग की थी।

अदालत की कड़ी टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश एस.के. कौल और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा, 'आप लोग परजीवी हैं। आप निवेशकों से पैसे लेते हैं और उन्हें धोखा देते हैं। हमें आपके साथ बहुत सख्ती से पेश आना होगा। समाज का हित तभी है जब आप जेल के अंदर हों, बाहर नहीं।'

आरोपी का मामला

याचिकाकर्ता मनोज कुमार सिंह के खिलाफ बिहार, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर में कई मामले दर्ज हैं। उसने दलील दी थी कि उसके खिलाफ कई राज्यों में केस चल रहे हैं और भविष्य में और मामले दर्ज हो सकते हैं, इसलिए सभी मामलों को एक साथ जोड़ा जाए और जमानत दी जाए।

मोडस ऑपरेंडी पर प्रकाश

अदालत ने साइबर ठगों के तरीके पर गौर करते हुए कहा कि वे एक क्षेत्र में काम करते हैं और फिर गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार स्थान बदलते रहते हैं। पीठ ने कहा, 'आप कठोर अपराधी हैं जिनके पीड़ित पूरे देश में फैले हैं। आप तमिलनाडु में किसी को धोखा देते हैं और फिर जम्मू चले जाते हैं।'

डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी पर संज्ञान

गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया था और साइबर ठगों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। अदालत के आदेश पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने डिजिटल गिरफ्तारी के बड़े मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है, ताकि इन संगठित गिरोहों के अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जांच हो सके। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जो बैंकों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को शामिल करते हुए नागरिकों को ऐसे फ्रॉड से बचाने और खोए हुए पैसे की वसूली के लिए प्रभावी निवारक उपाय विकसित करने का प्रयास कर रहा है।

FAQ

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर ठगों को क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर ठगों को 'परजीवी' कहा और कहा कि समाज तभी सुरक्षित है जब वे जेल में रहें।

किस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की?

यह टिप्पणी मनोज कुमार सिंह नामक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिस पर बिहार, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर में कई मामले दर्ज हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी पर क्या कदम उठाए?

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों का संज्ञान लेते हुए राज्यों को ऐसे मामले CBI को सौंपने का निर्देश दिया ताकि अंतरराष्ट्रीय लिंक की जांच हो सके।

स्रोत: www.hindustantimes.com

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