मुख्य तथ्य
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 17 जून 2026 को IPS अधिकारी सुंदरराज पट्टिलिंगम को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का महानिरीक्षक (IG) नियुक्त किया। वे बस्तर में माओवाद विरोधी अभियान के चेहरे रहे हैं। यह नियुक्ति सरकार द्वारा भारत को माओवाद मुक्त घोषित करने के लगभग तीन महीने बाद हुई है।
विस्तार से जानकारी
46 वर्षीय पट्टिलिंगम 2003 बैच के IPS अधिकारी हैं। उन्होंने बस्तर में 12 वर्षों तक सेवा दी, जहां प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का केंद्रीय गुरिल्ला मुख्यालय स्थित था। वे सात वर्षों तक बस्तर पुलिस के प्रमुख रहे।
बस्तर क्षेत्र के अधिकांश जिले—कांकेर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और कोंडागांव—कभी माओवाद प्रभावित थे। पट्टिलिंगम ने इन क्षेत्रों में विद्रोहियों के खिलाफ अभियान का नेतृत्व किया और वे प्रति-विद्रोह के चेहरे के रूप में उभरे।
वे कोयंबटूर के तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं और 2005 में बस्तर के कांकेर में स्थापित काउंटर-इन्सर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल से उन्नत कमांडो प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पहले पुलिस अधिकारियों में से एक थे।
प्रभाव और महत्व
पट्टिलिंगम की नियुक्ति NIA में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि वे माओवाद विरोधी अभियानों में अपने अनुभव का उपयोग कर सकते हैं। मार्च 2026 तक बस्तर के बीजापुर और सुकमा जिले, और झारखंड का पश्चिम सिंहभूम जिला ही अंतिम माओवाद प्रभावित क्षेत्र थे। अब केवल पश्चिम सिंहभूम चिंता का विषय है, जहां माओवादी नेता मिसिर बेसरा सारंडा जंगल में छिपे हुए हैं। सरकार ने उन्हें पकड़ने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए हैं।
बेसरा निष्क्रिय हैं और किसी भी गांव पर नियंत्रण नहीं रखते। माना जा रहा है कि वे आत्मसमर्पण या लड़ाई के बजाय जंगल में छिपे हुए हैं। 2000 के दशक के मध्य में माओवाद के चरम पर 100 से अधिक जिले प्रभावित थे।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण
यह नियुक्ति दर्शाती है कि केंद्र सरकार माओवाद विरोधी अभियानों में अनुभवी अधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों में शामिल कर रही है। पट्टिलिंगम का NIA में आना आतंकवाद और विद्रोह से संबंधित मामलों की जांच को मजबूत करेगा।
FAQ
सुंदरराज पट्टिलिंगम कौन हैं?
वे 2003 बैच के IPS अधिकारी हैं, जिन्होंने बस्तर में माओवाद विरोधी अभियान का नेतृत्व किया और अब NIA के IG नियुक्त हुए हैं।
उनकी नियुक्ति कब हुई?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 17 जून 2026 को इस नियुक्ति का आदेश जारी किया।
बस्तर में माओवाद की स्थिति क्या है?
मार्च 2026 तक बस्तर के अधिकांश जिले माओवाद मुक्त हो चुके थे, केवल झारखंड का पश्चिम सिंहभूम जिला चिंता का विषय है।