प्रमुख तथ्य
2022 में श्रीलंका में आए आर्थिक संकट के बाद, लगभग 60 परिवारों ने समुद्र पार कर भारत में शरण ली। ये परिवार वर्तमान में तमिलनाडु के मंडपम शिविर में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई आधिकारिक पहचान पत्र नहीं दिया गया है। भारत संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं होने के कारण, इन्हें 'अवैध प्रवासी' माना जाता है।
विस्तार से जानकारी
श्रीलंका में गृह युद्ध (1983-2009) के दौरान आए तमिल शरणार्थियों को शरणार्थी का दर्जा मिला और उन्हें आधार कार्ड जारी किए गए। लेकिन आर्थिक संकट से भागकर आए ये नए शरणार्थी बिना किसी दस्तावेज के जीवन बिता रहे हैं। मैरी (35) नाम की एक शरणार्थी महिला कहती हैं, "हमने अपनी गरिमा बचाने के लिए वायुनिया में सब कुछ बेच दिया और कर्ज चुकाकर भारत आए। लेकिन यहां हमें अपनी आत्मसम्मान की रक्षा के लिए रोज लड़ना पड़ता है।"
राजा (32) नाम के एक शरणार्थी बताते हैं, "हम वापस नहीं जाना चाहते क्योंकि वहां हमारे लिए कुछ नहीं है। मैं एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी खोलना चाहता हूं, लेकिन बिना पहचान पत्र के मोबाइल फोन या बैंक खाता भी नहीं खोल सकता।"
प्रभाव और शोषण
पहचान पत्र के अभाव में ये शरणार्थी स्थानीय शोषण का शिकार हो रहे हैं। जया (52) कहती हैं, "मेरे पति पेंटर हैं और ठेकेदार गूगल पे से वेतन देता है। फोन मंडपम के एक दुकानदार के नाम पर है, इसलिए पैसे उसके खाते में आते हैं। हर ₹1000 पर वह ₹100 कमीशन लेता है।"
कथिर (27) कहते हैं, "स्थानीय लोगों और पुराने शरणार्थियों के लिए हमारी मजबूरी एक फलता-फूलता व्यवसाय बन गई है।" उनके बच्चे केवल शिक्षकों की दयालुता से स्कूल में दाखिला पाते हैं, लेकिन आधार कार्ड न होने से उच्च शिक्षा अनिश्चित है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
चेन्नई के एक वरिष्ठ राजस्व अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार इन शरणार्थियों के बारे में जानती है। राज्य सरकार उन्हें भोजन और आश्रय दे रही है, लेकिन आधार कार्ड जारी करने के लिए केंद्र की मंजूरी आवश्यक है। शुरू में इनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने उन्हें वापस ले लिया।
शरणार्थियों की उम्मीद
मैरी कहती हैं, "हमने कई याचिकाएं दी हैं और उम्मीद करते हैं कि तमिलनाडु की नई सरकार हमें एक पहचान देगी जिससे हम आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें।"
FAQ
श्रीलंकाई शरणार्थियों को भारत में आधार कार्ड क्यों नहीं मिल रहा?
भारत संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, इसलिए आर्थिक संकट से आए शरणार्थियों को कानूनी दर्जा नहीं मिलता। केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना राज्य सरकार आधार जारी नहीं कर सकती।
मंडपम शिविर में शरणार्थियों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
बिना पहचान पत्र के वे बैंक खाता नहीं खोल सकते, मोबाइल नहीं खरीद सकते, और बच्चों की उच्च शिक्षा अनिश्चित है। स्थानीय लोग और पुराने शरणार्थी उनका शोषण करते हैं।
तमिलनाडु सरकार शरणार्थियों के लिए क्या कर रही है?
राज्य सरकार उन्हें भोजन और आश्रय प्रदान कर रही है, लेकिन आधार जारी करने के लिए केंद्र की मंजूरी आवश्यक है। शरणार्थियों ने राज्य सरकार से पहचान पत्र देने की अपील की है।