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सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल 13वें दिन भी जारी, शरीर में दिख रही हड्डियां लेकिन ऊर्जा बरकरार

प्रमुख तथ्य पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल 13वें दिन भी जारी है। उन्होंने बताया कि उनकी हड्डियां दिखने लगी हैं, लेकिन वे ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं। इस दौरान उनका वजन 7.5 किलोग्राम…

प्रमुख तथ्य

पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल 13वें दिन भी जारी है। उन्होंने बताया कि उनकी हड्डियां दिखने लगी हैं, लेकिन वे ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं। इस दौरान उनका वजन 7.5 किलोग्राम कम हो गया है।

विस्तार से जानकारी

सोनम वांगचुक, जो आइस स्तूपा तकनीक के लिए जाने जाते हैं, लद्दाख के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए लंबे समय से आंदोलनरत हैं। उनकी वर्तमान भूख हड़ताल लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और क्षेत्र के लिए विशेष विकास पैकेज की मांग को लेकर है।

प्रभाव और प्रतिक्रियाएं

इस भूख हड़ताल ने देशभर में ध्यान आकर्षित किया है। कई सामाजिक संगठनों और पर्यावरण समूहों ने उनके समर्थन में बयान जारी किए हैं। हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी उनके आंदोलन को समर्थन मिल रहा है, हालांकि यह मुख्य रूप से लद्दाख से जुड़ा मुद्दा है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

  • सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल 13 दिनों से जारी है।
  • उनका वजन 7.5 किलो कम हो गया है और हड्डियां दिखने लगी हैं।
  • वे ऊर्जावान बने हुए हैं और अपनी मांगों पर अड़े हैं।

FAQ

सोनम वांगचुक कौन हैं?

सोनम वांगचुक लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् हैं, जिन्होंने आइस स्तूपा तकनीक विकसित की।

उनकी भूख हड़ताल की मुख्य मांग क्या है?

वे लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और क्षेत्र के विकास के लिए विशेष पैकेज की मांग कर रहे हैं।

भूख हड़ताल का उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ा है?

13 दिनों में उनका वजन 7.5 किलो कम हो गया है और हड्डियां दिखने लगी हैं, लेकिन वे ऊर्जावान बने हुए हैं।

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