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सोलन में टीबी के 450 नए मरीज, 65 गंभीर: सरकार ने शुरू किया निशुल्क इलाज

सोलन में टीबी मुक्त अभियान 2.0 के नतीजे सोलन जिले में टीबी मुक्त अभियान 2.0 के तहत 100 दिनों तक चले विशेष अभियान में 450 नए टीबी मरीजों की पुष्टि हुई है। इनमें से 65…

सोलन में टीबी मुक्त अभियान 2.0 के नतीजे

सोलन जिले में टीबी मुक्त अभियान 2.0 के तहत 100 दिनों तक चले विशेष अभियान में 450 नए टीबी मरीजों की पुष्टि हुई है। इनमें से 65 मरीज एमडीआर-टीबी (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी) से ग्रसित पाए गए हैं, जो गंभीर श्रेणी में आते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत सभी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया है।

एमडीआर-टीबी: चुनौती और उपचार

एमडीआर-टीबी में प्रथम श्रेणी की दवाएं काम नहीं करतीं, इसलिए विशेष दवाओं की आवश्यकता होती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ऐसे मरीजों को एक विशेष दवा दी जा रही है, जिसकी एक डोज की कीमत करीब 60 हजार रुपये है। सरकार यह उपचार पूरी तरह निशुल्क प्रदान कर रही है।

350 से अधिक गांवों में जांच शिविर

स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 350 से अधिक गांवों में अभी तक जांच शिविर नहीं लगाए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय पाठक ने टीमों को निर्देश दिए हैं कि शेष गांवों में जल्द से जल्द निक्षय शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों की जांच सुनिश्चित की जाए। विभाग को आशंका है कि इन गांवों में जांच के बाद मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।

प्रदेश में सोलन की स्थिति

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में सोलन में एमडीआर-टीबी मरीजों की संख्या सबसे कम है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य सिर्फ संख्या कम रखना नहीं, बल्कि टीबी का पूर्ण उन्मूलन है।

भविष्य की रणनीति: टीपीटी पर जोर

डॉ. अजय पाठक ने बताया, 'हमारा अगला लक्ष्य टीबी मरीजों के परिजनों को जल्द से जल्द टीपीटी (टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी) से जोड़ना है, ताकि संक्रमण की शृंखला को समय रहते रोका जा सके।' यह थेरेपी संक्रमण को फैलने से रोकने में कारगर मानी जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सोलन जिले में टीबी के कितने नए मरीज मिले?

100 दिनों के अभियान में 450 नए टीबी मरीजों की पुष्टि हुई।

एमडीआर-टीबी कितने मरीजों में पाई गई?

450 मरीजों में से 65 में एमडीआर-टीबी (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी) पाई गई।

एमडीआर-टीबी का इलाज कैसे किया जा रहा है?

सरकार 60 हजार रुपये प्रति डोज की विशेष दवा निशुल्क उपलब्ध करा रही है।

आगे क्या योजना है?

मरीजों के परिजनों को टीपीटी (टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी) से जोड़कर संक्रमण श्रृंखला को रोकना है।

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