मुख्य तथ्य
मुंबई: शिवसेना UBT के दो लोकसभा सांसदों ने बुधवार (17 जून, 2026) को स्पीकर को लिखे पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिससे ऑपरेशन टाइगर फिलहाल रुक गया है। यह जानकारी शीर्ष सूत्रों ने दी।
विस्तार से
दो सांसद ओमराजे निंबालकर और संजय दिना पाटिल हैं। इनमें से संजय दिना पाटिल बुधवार दोपहर तक उद्धव सेना नेताओं के संपर्क में थे। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन टाइगर तब तक सफल नहीं होगा जब तक कम से कम छह सांसद एक साथ न आएं।
प्रभाव और आगे की राह
एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'यह अभी लंबी प्रक्रिया है। एक साथ आने और पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद उन्हें स्पीकर के सामने पेश होना होगा। उसके बाद उचित प्रक्रिया शुरू होगी। यह एक या दो दिन का मामला नहीं है।'
ओमराजे निंबालकर पर दबाव
शिवसेना UBT नेताओं ने दावा किया कि उनके सांसद ओमराजे निंबालकर पर उनके पिता पवनराजे निंबालकर की हत्या से जुड़े अदालती फैसले के कारण दबाव डाला जा रहा है। एक नेता ने कहा, 'ओमराजे निंबालकर के लिए लटकती तलवार पवनराजे निंबालकर मामले का फैसला है। इसे 20 जून तक टाल दिया गया है। हमें पता चला है कि फैसला इस बात पर निर्भर है कि वह शिवसेना का समर्थन करते हैं या नहीं।'
पवनराजे निंबालकर हत्याकांड
मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत 20 जून को कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की 2006 में हुई हत्या के मामले में फैसला सुनाएगी। इस मामले की सुनवाई 15 साल तक चली है। इसमें पूर्व एनसीपी सांसद पदमसिंह पाटिल (पीड़ित के चचेरे भाई) के खिलाफ कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की साजिश का आरोप है।
FAQ
ऑपरेशन टाइगर क्या है?
ऑपरेशन टाइगर शिवसेना UBT के सांसदों को पार्टी से अलग कराने की एक राजनीतिक रणनीति है, जिसमें स्पीकर को पत्र देकर पार्टी बदलने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
ओमराजे निंबालकर पर क्या दबाव है?
उनके पिता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट का फैसला 20 जून को आना है। शिवसेना UBT का आरोप है कि फैसला उनके समर्थन पर निर्भर करता है।
कितने सांसदों के साथ ऑपरेशन टाइगर सफल होगा?
सूत्रों के अनुसार, कम से कम छह सांसदों के एक साथ आने पर ही यह ऑपरेशन सफल हो सकता है।
स्रोत: www.thehindu.com