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शिमला की सड़कों पर बढ़ा भार: पीक ऑवर्स में थम जाती है वाहनों की रफ्तार

शिमला की सड़कों पर बढ़ा भार, पीक ऑवर्स में थम जाती है वाहनों की रफ्तार शिमला, 20 जून 2026। ऐतिहासिक शहर और प्रदेश की राजधानी शिमला में बढ़ती भीड़ के कारण पीक ऑवर्स में जिंदगी…

शिमला की सड़कों पर बढ़ा भार, पीक ऑवर्स में थम जाती है वाहनों की रफ्तार

शिमला, 20 जून 2026। ऐतिहासिक शहर और प्रदेश की राजधानी शिमला में बढ़ती भीड़ के कारण पीक ऑवर्स में जिंदगी रेंगती नजर आती है। शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले सर्कुलर रोड और अन्य मुख्य सड़कों पर पीक ऑवर्स में वाहनों का बोझ इतना बढ़ गया है कि पूरा शिमला जाम के जाल में फंस जाता है।

ट्रैफिक जाम के प्रमुख कारण

शिमला शहर का एजुकेशन हब के रूप में विकसित होना और सर्कुलर सड़क के आसपास ही सचिवालय सहित अधिकतर विभागों के निदेशालयों तथा मुख्यालयों का होना जाम की मुख्य वजह है। सड़क के आसपास आईजीएमसी, दीनदयाल उपाध्याय क्षेत्रीय अस्पताल (रिपन) और मातृ एवं शिशु अस्पताल कमला नेहरू (केएनएच) जैसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान भी हैं। सड़कों और अन्य सुविधाओं का विस्तार इस हिसाब से नहीं हुआ कि वह वाहनों का दबाव झेल सके।

10 किमी के दायरे में दो दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थान

शिमला शहर के 10 किलोमीटर के दायरे में दो दर्जन से अधिक नामी स्कूल, बड़े उच्च शिक्षण संस्थान, कॉलेज और प्रोफेशनल संस्थान मौजूद हैं। स्कूलों के सर्कुलर सड़क पर स्थित होने और इन स्कूलों के पास अपनी पार्किंग की सुविधा न होने से रोज वाहनों का लंबा जाम लगता है। सरकारी कार्यालयों में रोजाना सफर करने वाले हजारों कर्मचारियों की गाड़ियों, अस्पतालों में आने वाले मरीजों के वाहनों के अलावा निजी तथा सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लिए चलने वाली टैक्सियों और बसों के कारण सर्कुलर सड़क पर ट्रैफिक का बोझ दो दशकों में कई गुना बढ़ गया है।

सर्कुलर रोड के आसपास प्रमुख स्कूल

  • लोरेटो कॉन्वेंट ताराहॉल
  • सेंट एडवर्ड
  • कॉन्वेंट ऑफ जीजस एंड मैरी
  • राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लालपानी
  • एसडी सीनियर सेकेंडरी
  • दयानंद पब्लिक स्कूल
  • केंद्रीय विद्यालय जाखू
  • आर्य समाज स्कूल
  • सेंट थॉमस
  • पोर्टमोर गर्ल्स स्कूल
  • संजौली गवर्नमेंट स्कूल
  • मोनाल पब्लिक स्कूल

इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या न्यूनतम 500 से लेकर अधिकतम 3,000 तक है।

उच्च शिक्षण संस्थान

  • आरकेएमवी
  • सेंट बेड्स
  • राजीव गांधी महाविद्यालय चौड़ा मैदान
  • एचपीयू
  • संजौली कॉलेज
  • यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इवनिंग स्टडीज

हर संस्थान में दो हजार से अधिक विद्यार्थी हैं।

पीक ऑवर्स में बेकाबू हो जाती है वाहनों की संख्या

सुबह 8:00 से 10:30 बजे तक और दोपहर बाद 3:00 से शाम 5:30 बजे तक सर्कुलर सड़क पर वाहनों की संख्या बेतहाशा बढ़ जाती है, जो शहर में मुख्य रूप से जाम का कारण बनती है। इन पीक ऑवर्स में ही स्कूली विद्यार्थियों के लिए परिवहन निगम की 38 चार्टर्ड बसों के अलावा सैकड़ों निजी स्कूल टैक्सियां, बसें और सरकारी कर्मचारियों के निजी वाहन एक साथ सड़कों पर निकलते हैं। इस वजह से पूरी राजधानी में चक्का जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।

निष्कर्ष

शिमला में ट्रैफिक जाम की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। स्कूल-कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों के कारण पीक ऑवर्स में हालात बेकाबू हो जाते हैं। जरूरी है कि प्रशासन पार्किंग सुविधाओं का विस्तार करे और वैकल्पिक मार्ग विकसित करे ताकि लोगों को राहत मिल सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

शिमला में ट्रैफिक जाम की मुख्य वजह क्या है?

शिमला में ट्रैफिक जाम की मुख्य वजह सर्कुलर रोड पर स्थित दो दर्जन से अधिक स्कूल-कॉलेज, बड़े अस्पताल और सरकारी दफ्तर हैं, जहां पीक ऑवर्स में हजारों वाहन एक साथ निकलते हैं।

शिमला में सबसे ज्यादा जाम कब लगता है?

सुबह 8 से 10:30 बजे तक और दोपहर 3 से शाम 5:30 बजे तक पीक ऑवर्स में सबसे ज्यादा जाम लगता है।

सर्कुलर रोड पर कितने स्कूल स्थित हैं?

सर्कुलर रोड के आसपास 11 सरकारी और निजी स्कूल स्थित हैं, जिनमें लोरेटो कॉन्वेंट, सेंट एडवर्ड, केंद्रीय विद्यालय जाखू आदि शामिल हैं।

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