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वरिष्ठ नेता डॉ. शेख मुस्तफा कमाल का निधन, जम्मू-कश्मीर में शोक की लहर

वरिष्ठ नेता डॉ. शेख मुस्तफा कमाल का निधन नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. शेख मुस्तफा कमाल का मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को श्रीनगर में निधन हो गया। वे 84 वर्ष…

वरिष्ठ नेता डॉ. शेख मुस्तफा कमाल का निधन

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. शेख मुस्तफा कमाल का मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को श्रीनगर में निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। डॉ. कमाल नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के छोटे भाई और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के चाचा थे।

पारिवारिक शोक और श्रद्धांजलि

उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, “चाचा मुस्तफा पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ थे, लेकिन चार दिन पहले उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्होंने बहादुरी से लड़ाई लड़ी, लेकिन अल्लाह ने उन्हें अपने पास बुला लिया। अल्लाह उन्हें जन्नत में सबसे ऊंचा मुकाम दे।” नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता ने कहा, “डॉ. कमाल साहब ने अपने दशकों का जीवन सार्वजनिक सेवा और NC के आदर्शों को मजबूत करने में समर्पित किया। उनका जाना NC परिवार और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है।”

राजनीतिक विरासत और विचार

डॉ. शेख मुस्तफा कमाल नेशनल कॉन्फ्रेंस के उन गिने-चुने नेताओं में थे जो जम्मू-कश्मीर के लिए 1953 से पहले की स्थिति की बहाली के पक्षधर थे। वे अक्सर कांग्रेस पर कश्मीर मुद्दे को उलझाने का आरोप लगाते थे और 1953 में उनके पिता और पार्टी संस्थापक शेख मुहम्मद अब्दुल्ला की गिरफ्तारी को “काला दिन” बताते थे। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था, “1952 का दिल्ली समझौता और संविधान का अनुच्छेद 370, महाराजा हरि सिंह के विलय पत्र पर आधारित था, जो जम्मू-कश्मीर के केंद्र के साथ संबंधों का आधार था। लेकिन धीरे-धीरे सद्र-ए-रियासत और वजीर-ए-आजम जैसे पद हटा दिए गए।” उनके अनुसार, 1953 से पहले की स्थिति में “संचार, विदेशी मामले और रक्षा को छोड़कर सभी अधिकार कश्मीर के लोगों के पास थे।”

विवादास्पद बयान और भूमिका

अपने मुखर और साहसिक बयानों के लिए जाने जाने वाले डॉ. कमाल ने कई विवाद भी खड़े किए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) के लगातार विरोध से सेना को नाराज किया। कांग्रेस नेता मखन लाल फोतेदार के खिलाफ उनकी “आस्तीन का सांप” टिप्पणी ने NC को उनसे दूरी बनाने पर मजबूर कर दिया। 2012 में राहुल गांधी पर हमले के बाद उन्हें पार्टी प्रवक्ता के पद से हटा दिया गया था।

प्रारंभिक जीवन और करियर

अपने शुरुआती जीवन में डॉ. कमाल ने उत्तर कश्मीर के तंगमर्ग में एक सामान्य चिकित्सक के रूप में सेवा की, जहाँ से उनकी माँ का संबंध था। बाद में वे दो बार मंत्री बने और NC के अतिरिक्त महासचिव के रूप में कार्य किया।

शोक संदेश

जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय दलों ने भी डॉ. कमाल के निधन पर शोक व्यक्त किया। विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने शोक जताया। कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने कहा, “वरिष्ठ नेता के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ। डॉ. फारूक अब्दुल्ला साहब, उमर अब्दुल्ला साहब और शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. शेख मुस्तफा कमाल कौन थे?

वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के छोटे भाई थे।

डॉ. शेख मुस्तफा कमाल का निधन कब और कहाँ हुआ?

उनका निधन 14 जुलाई 2026 को श्रीनगर के एक निजी अस्पताल में बीमारी के कारण हुआ।

डॉ. शेख मुस्तफा कमाल के राजनीतिक विचार क्या थे?

वे जम्मू-कश्मीर के लिए 1953 से पहले की स्थिति की बहाली के पक्षधर थे और कांग्रेस पर विशेष दर्जा खत्म करने का आरोप लगाते थे।

डॉ. शेख मुस्तफा कमाल के निधन पर किसने शोक व्यक्त किया?

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, मीरवाइज उमर फारूक सहित कई नेताओं ने शोक जताया।

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