Himachal | Himachal News Today

ऊना में स्कूल प्रबंधन समितियों के गठन पर सवाल: शैक्षणिक योग्यता को नजरअंदाज कर रहे विभाग

मुख्य तथ्य हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में सरकारी स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इनके गठन में शैक्षणिक योग्यता को नजरअंदाज किए जाने से अभिभावकों में नाराजगी…

मुख्य तथ्य

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में सरकारी स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इनके गठन में शैक्षणिक योग्यता को नजरअंदाज किए जाने से अभिभावकों में नाराजगी है। कई स्कूलों में ऐसे लोगों को एसएमसी प्रधान बना दिया गया है जिन्हें स्कूल संचालन और शिक्षा व्यवस्था की सीमित जानकारी है।

एसएमसी की बढ़ती जिम्मेदारियां

शिक्षा विभाग ने स्कूलों में निर्माण कार्यों की निगरानी, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, विद्यार्थियों की सुविधाओं और आधारभूत ढांचे के रखरखाव में एसएमसी की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाया है। इसके बावजूद समिति गठन में पात्रता और क्षमता के बजाय केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

समस्याएं और चिंताएं

  • कई स्कूलों में एसएमसी की बैठकें नियमित रूप से नहीं हो रही हैं।
  • बैठकों में शैक्षणिक गुणवत्ता, खेल सुविधाओं और संसाधनों पर गंभीर चर्चा के बजाय औपचारिकताएं ही निभाई जा रही हैं।
  • इससे समिति के गठन का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।

अभिभावकों की मांग

अभिभावक नरोत्तम शर्मा ने कहा, "स्कूल प्रबंधन समिति के गठन में पदाधिकारियों की शैक्षणिक योग्यता और जागरूकता को विशेष महत्व दिया जाए।" उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को शिक्षा के महत्व और स्कूल प्रबंधन की समझ नहीं होगी तो वह विद्यालय के विकास में प्रभावी भूमिका नहीं निभा पाएगा।

अभिभावक हरजिंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में एसएमसी अध्यक्ष बनने के लिए बच्चे का उसी स्कूल में पढ़ना, नैतिक चरित्र और लोकतांत्रिक चुनाव जैसी शर्तों पर जोर है। उन्होंने मांग की कि शैक्षणिक समझ और सामाजिक सक्रियता को भी चयन का आधार बनाया जाए।

विभाग का रुख

उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि एसएमसी का गठन तय मानकों के तहत होता है और शैक्षणिक योग्यता को लेकर कोई अलग दिशा-निर्देश नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध में आदेश जारी होते हैं तो उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण

यह मुद्दा हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा है। अभिभावकों को चाहिए कि वे एसएमसी चुनावों में सक्रिय भागीदारी करें और योग्य उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसएमसी के गठन में शैक्षणिक योग्यता क्यों जरूरी है?

शैक्षणिक योग्यता से पदाधिकारी स्कूल संचालन, शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को बेहतर समझ सकते हैं, जिससे विद्यालय का विकास प्रभावी होता है।

वर्तमान में एसएमसी अध्यक्ष बनने के लिए क्या शर्तें हैं?

अभिभावक का बच्चा उसी स्कूल में पढ़ता हो, नैतिक चरित्र, निष्ठा और लोकतांत्रिक चुनाव जैसी शर्तें हैं, लेकिन शैक्षणिक योग्यता कोई मापदंड नहीं है।

क्या शिक्षा विभाग एसएमसी गठन में बदलाव करेगा?

उपनिदेशक सोमलाल धीमान के अनुसार फिलहाल शैक्षणिक योग्यता को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं है, लेकिन यदि आदेश जारी होते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।

Follow us on Google News

Explore more

टांडा मेडिकल कॉलेज पर 131 करोड़ का कर्ज, मरीजों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

मुख्य तथ्य डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा, जो हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है, पर वित्तीय संकट…

More on Himachal from Himachal Pradesh

कैंपस इंटरव्यू में 112 युवाओं का चयन, मारुति सुजुकी ने ज्वाली संस्थान में लगाई भर्ती

कांगड़ा में रोजगार के नए अवसर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ज्वाली में स्थित शहीद सुरेंद्र सिंह राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान…

जेम पोर्टल पंजीकरण और सरकारी खरीद प्रक्रिया पर कार्यशाला आयोजित

कार्यशाला का आयोजन शाहपुर (कांगड़ा) के बीडीओ कार्यालय रैत के समिति हाल में उद्योग विभाग द्वारा रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (RAMP)…

Kangra: Karmu Mod Project Contractor’s Tender Cancelled Due to Slow Progress

Key Facts The Lok Nirman Vibhag (Public Works Department) has cancelled the tender of the contractor responsible for the road safety project…