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Sabarimala महिला प्रवेश विवाद फिर गर्माया: पूर्व TDB प्रमुख के दावों से हलचल

मुख्य तथ्य केरल में Sabarimala महिला प्रवेश का संवेदनशील मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। यह विवाद तब गर्माया जब मीडिया रिपोर्टों में पूर्व Travancore Devaswom Board (TDB) अध्यक्ष A Padmakumar के कथित खुलासों…

मुख्य तथ्य

केरल में Sabarimala महिला प्रवेश का संवेदनशील मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। यह विवाद तब गर्माया जब मीडिया रिपोर्टों में पूर्व Travancore Devaswom Board (TDB) अध्यक्ष A Padmakumar के कथित खुलासों का जिक्र हुआ। ये खुलासे 2019 में मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश से जुड़ी घटनाओं पर केंद्रित हैं।

पूर्व TDB प्रमुख के दावे

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, Padmakumar ने अपने करीबी सहयोगियों को बताया कि जिस दिन दो महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Sabarimala मंदिर में प्रवेश किया, उन्हें और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी S Sreejith को जानबूझकर सन्निधानम से दूर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक 'अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्ति' द्वारा रची गई साजिश थी, जिसका पार्टी और तत्कालीन वाम सरकार पर काफी प्रभाव था। Padmakumar ने यह भी दावा किया कि उन्हें उस दिन Sabarimala जाने के बजाय Thiruvananthapuram जाने का निर्देश दिया गया था।

CPI का रुख

CPI ने इन आरोपों पर सीधी प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। पार्टी के राज्य सचिव M V Govindan ने कहा कि स्पष्टीकरण Padmakumar को ही देना चाहिए। Govindan ने कहा, "इन सभी आरोपों का जवाब देना हमारी जिम्मेदारी नहीं है। ये सवाल Padmakumar से पूछे जाने चाहिए।" उन्होंने यह भी बताया कि Padmakumar को Sabarimala सोना चोरी मामले में जेल से बाहर आने के बाद सभी पार्टी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया था। Govindan ने कहा कि संगठनात्मक कार्रवाई का फैसला CPI की Pathanamthitta जिला समिति करेगी।

विवाद की पृष्ठभूमि

Sabarimala महिला प्रवेश मुद्दा केरल के सबसे विवादास्पद राजनीतिक और सामाजिक विवादों में से एक है। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी सदियों पुरानी रोक को हटा दिया था। इस फैसले के खिलाफ केरल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें अयप्पा भक्तों और संघ परिवार के संगठनों ने सरकार पर मंदिर परंपराओं में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। जनवरी 2019 में जब दो महिलाओं ने पुलिस सुरक्षा में मंदिर में प्रवेश किया, तो विवाद चरम पर पहुंच गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan के नेतृत्व वाली वाम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना अपना कर्तव्य बताया था।

वर्तमान स्थिति

Padmakumar के ताजा दावों ने इस मुद्दे को फिर से जीवित कर दिया है। वह खुद Sabarimala सोना चोरी मामले में आरोपी हैं और जमानत पर बाहर हैं। उन्होंने अब तक सार्वजनिक रूप से इन रिपोर्टों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक प्रथाओं और लैंगिक न्याय पर व्यापक सवाल उठाने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ को भेज दिया है, और यह मामला अभी भी लंबित है।

FAQ

Sabarimala महिला प्रवेश विवाद क्या है?

यह विवाद 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है जिसने 10-50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध हटा दिया था, जिसके बाद 2019 में दो महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश किया था।

A Padmakumar ने क्या आरोप लगाए हैं?

Padmakumar ने आरोप लगाया है कि 2019 में महिलाओं के प्रवेश के दिन उन्हें और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी S Sreejith को जानबूझकर सन्निधानम से दूर रखा गया था, और यह एक 'अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्ति' द्वारा साजिश थी।

CPI ने इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?

CPI राज्य सचिव M V Govindan ने कहा कि पार्टी इन आरोपों पर जवाब देने के लिए जिम्मेदार नहीं है और स्पष्टीकरण Padmakumar को ही देना चाहिए।

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