प्रमुख घटनाक्रम
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। यह निर्णय अयोध्या राम मंदिर में कथित दान चोरी के विवाद के बाद लिया गया। ट्रस्ट ने सुशासन को मजबूत करने के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद सृजित करने की भी घोषणा की।
बैठक में लिए गए अहम फैसले
अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर स्थित अतिथि गृह में दोपहर 3:15 बजे शुरू हुई बैठक में ट्रस्ट के नौ स्थायी सदस्यों में से सात उपस्थित रहे, जिनमें अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास भी शामिल थे। बैठक में निम्नलिखित निर्णय लिए गए:
- चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए।
- कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
- CEO पद सृजित करने का निर्णय लिया गया।
- CEO पद के लिए उम्मीदवार की सिफारिश हेतु तीन सदस्यीय समिति गठित की गई।
कौन हैं कृष्ण मोहन?
74 वर्षीय कृष्ण मोहन पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी और आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी हैं। वे हरदोई जिले के निवासी हैं और पूर्वी उत्तर प्रदेश के आरएसएस क्षेत्र संघ चालक हैं। फरवरी 2025 में संस्थापक सदस्य कमलेश्वर चौपाल के निधन के बाद सितंबर में उन्हें ट्रस्टी नियुक्त किया गया था।
CEO पद के लिए समिति गठित
ट्रस्ट ने CEO पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार की सिफारिश करने हेतु तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे शामिल हैं। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को होगी, जिसमें नए ट्रस्टी की नियुक्ति पर भी निर्णय लिया जाएगा।
ट्रस्ट का वित्तीय विवरण
ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए बताया कि गठन के बाद से निधि समर्पण अभियान और अन्य दान के माध्यम से 3,246 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिसमें से 2,370 करोड़ रुपये राम मंदिर निर्माण और संबंधित पूंजीगत कार्यों पर खर्च किए गए। 31 मार्च 2026 तक मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की चढ़ावा राशि 582 करोड़ रुपये रही, जिसमें से 319 करोड़ रुपये मंदिर संचालन पर खर्च हुए, जबकि शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित है। ट्रस्ट ने यह भी बताया कि 2,826 दान की गई वस्तुओं का विस्तृत रजिस्टर रखा जाता है, जिसमें फोटो, रसीद और सूची शामिल है। चांदी की वस्तुओं को सरकारी टकसाल में शुद्धता और वजन दर्ज करने के बाद चांदी की ईंटों में बदला गया है।
ट्रस्टी का बयान
बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने मीडिया से कहा, "हम सभी इस घटना से आहत और दुखी हैं। चोरी की मात्रा चाहे छोटी हो या बड़ी, यह गौण मुद्दा है; हम मुख्य रूप से इस बात से व्यथित हैं कि यहां ऐसा माहौल बनने दिया गया। हालांकि, वास्तविकता हमारे सामने है और इस पर विचार करना हमारा कर्तव्य है।" उन्होंने आगे बताया, "मौजूदा परिस्थितियों में एक गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई: हमारे महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने इस्तीफे सौंप दिए। चंपत राय बहुत आहत थे; उन्होंने तब तक पद पर बने रहना अनुचित समझा जब तक न्याय नहीं मिल जाता—अर्थात दोषियों को पकड़कर उचित सजा नहीं मिल जाती। इस भावना से प्रेरित होकर उन्होंने इस्तीफा दिया। के. पारसरन ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया: ट्रस्ट के संविधान के अनुसार, इस्तीफा देते ही स्वीकार मान लिया जाता है।"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने क्यों दिया इस्तीफा?
दान चोरी की घटना से आहत होकर और न्याय सुनिश्चित होने तक पद पर बने रहना अनुचित समझते हुए दोनों ने इस्तीफा दिया।
नए अंतरिम महासचिव कौन हैं?
कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे पूर्व आईएफएस अधिकारी और आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी हैं।
ट्रस्ट ने CEO पद क्यों बनाया?
दान चोरी विवाद के बाद प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए CEO पद सृजित किया गया है।
ट्रस्ट के पास कितनी चढ़ावा राशि है?
31 मार्च 2026 तक 582 करोड़ रुपये चढ़ावा मिला, जिसमें से 319 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।