विवाद की शुरुआत
राम चरण अभिनीत फिल्म 'पेड्डी' रिलीज के बाद से विवादों में घिरी हुई है। ताजा मामले में, विजयनगरम जिले के आदिवासी संयुक्त कार्रवाई समिति के अध्यक्ष तुम्मी अप्पाला राजू डोरा ने मंगलवार (16 जून, 2026) को फिल्म से 'कोंडाना कोडका' जैसे शब्द हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि ये शब्द आदिवासी समुदाय की भावनाओं को आहत करते हैं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दंडनीय हैं।
पुलिस को सौंपी गई शिकायत
श्री अप्पाला राजू ने विजयनगरम के पुलिस अधीक्षक ए.आर. दामोदर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें फिल्म से आपत्तिजनक शब्दों को हटाने और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्देशक बुची बाबू सना ने रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर आदिवासी जीवन का गलत चित्रण किया है।
निर्देशक का पूर्व बयान
गौरतलब है कि इससे पहले फिल्म में जान्हवी कपूर के किरदार के चित्रण को लेकर भी विवाद हुआ था। तब निर्देशक बुची बाबू सना ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा था, 'सिनेमा को मनोरंजन, प्रेरणा और दर्शकों से जुड़ना चाहिए। इसे कभी किसी को असहज या अपमानित महसूस नहीं कराना चाहिए।' उन्होंने कहा था कि वे आलोचना को गंभीरता से लेंगे और संबंधित हिस्सों में बदलाव करेंगे।
फिल्म के बारे में
'पेड्डी' 4 जून, 2026 को रिलीज हुई थी। इसमें राम चरण के अलावा जान्हवी कपूर और शिवराजकुमार मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म एक दूरदराज के गांव में रहने वाले एक दिहाड़ी मजदूर की कहानी है, जो अपनी पहचान के लिए खेल का सहारा लेता है। संगीत ए.आर. रहमान ने दिया है और छायांकन रथनवेलु ने किया है।
आदिवासी संगठन की मांग
श्री अप्पाला राजू ने निर्देशकों और पटकथा लेखकों से अपील की है कि वे फिल्म बनाने से पहले आदिवासी विशेषज्ञों से सलाह लें, ताकि रिलीज के बाद विवाद न हो। उन्होंने कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता का मतलब किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।
FAQ
पेड्डी फिल्म में कौन से शब्द आपत्तिजनक बताए गए हैं?
आदिवासी संगठन ने 'कोंडाना कोडका' जैसे शब्दों पर आपत्ति जताई है, जिन्हें वे आदिवासी समुदाय के लिए अपमानजनक मानते हैं।
फिल्म के निर्देशक ने इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
निर्देशक बुची बाबू सना ने पहले जान्हवी कपूर के किरदार के चित्रण पर आलोचना के बाद माफी मांगी थी और अब आदिवासी संगठन की शिकायत पर भी संज्ञान लेने का आश्वासन दिया है।
क्या इस मामले में कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
आदिवासी संगठन ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है, जिस पर पुलिस जांच कर रही है।
स्रोत: www.thehindu.com