प्रदर्शन का आयोजन
हुब्बल्ली में मंगलवार को CPI(M), CPI और जनपरा संघटनगल वेदिके के बैनर तले एक प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से मतदाता सूचियों के आगामी विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान सभी के मतदान अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।
तार्किक विसंगति का मुद्दा
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए CPI(M) के धारवाड़ जिला सचिव महेश पट्टार ने कहा कि अब तक हुए SIR में पश्चिम बंगाल को छोड़कर किसी भी राज्य में तार्किक विसंगति का पैमाना लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में यह पैमाना लागू किया जा रहा है, जिससे विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों से मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं।
“हालांकि, कर्नाटक में तार्किक विसंगति लागू की जा रही है, जो विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों से मतदाताओं की एक निश्चित संख्या को हटाने की संभावना को इंगित करती है। वर्तनी की गलतियाँ, माता-पिता के साथ आयु का अंतर, अंतरजातीय जोड़े, छह से अधिक बच्चों वाले मतदाता इस पैमाने से प्रभावित हो सकते हैं और अंततः मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।”
सरकार को ज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने तालुक अधिकारियों को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें मांग की गई कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि दस्तावेजों के अभाव में किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए, और ECI के दिशानिर्देशों में उल्लिखित विभिन्न रिकॉर्ड जारी करने के नियमों को सरल बनाया जाए।
अन्य मांगें
- राज्य सरकार ECI से SIR के दौरान तार्किक विसंगति लागू न करने का अनुरोध करे।
- ECI से मतदाता सूची कंप्यूटर पठनीय प्रारूप में जारी करने का आग्रह करे।
- आम जनता की सहायता के लिए मतदाता सेवा केंद्र स्थापित किए जाएं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
महेश पट्टार ने आरोप लगाया कि NDA सरकार पहले CAA और NRC लागू करने में असफल रही, और अब वह चुनाव आयोग का दुरुपयोग कर अपनी सांप्रदायिक विचारधारा को लागू कर रही है।
FAQ
प्रदर्शन का मुख्य कारण क्या था?
प्रदर्शन का मुख्य कारण मतदाता सूची के विशेष संशोधन (SIR) के दौरान तार्किक विसंगति के आधार पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका थी।
प्रदर्शन का आयोजन किसने किया?
प्रदर्शन का आयोजन जनपरा संघटनगल वेदिके, CPI(M) और CPI की जिला समितियों ने किया।
प्रदर्शनकारियों ने क्या मांगें रखीं?
उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि दस्तावेजों के अभाव में किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए, तार्किक विसंगति लागू न की जाए, मतदाता सूची कंप्यूटर पठनीय प्रारूप में जारी की जाए, और मतदाता सेवा केंद्र स्थापित किए जाएं।
Source: www.thehindu.com