मुख्य तथ्य
पालमपुर (कांगड़ा) में एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने जनसंख्या दिवस पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल 11 जुलाई को जनसंख्या दिवस मनाया जाता है, लेकिन यह महज एक दिखावा है। असल में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
शांता कुमार के बयान का विवरण
शांता कुमार ने कहा, 'आज पूरे भारत में जनसंख्या दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि भारत इस दिवस के बहाने आबादी नियंत्रण का हर साल केवल एक ढोंग करता है।' उन्होंने बताया कि 1947 में देश की जनसंख्या 39 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 145 करोड़ हो गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकारी प्रयास नाकाफी रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यदि जनसंख्या को सौ करोड़ पर ही रोक दिया गया होता, तो आज देश में इतनी भयंकर गरीबी और बेरोजगारी नहीं होती। उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चार पत्र लिखे, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला।
प्रभाव और चिंताएं
शांता कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री बहुत काम कर रहे हैं, लेकिन बढ़ती आबादी की भयंकर समस्या पर उन्होंने कोई उचित कार्रवाई नहीं की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में संसाधनों की कमी और सामाजिक असमानता और बढ़ेगी।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- जनसंख्या दिवस सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि असली चुनौती जनसंख्या वृद्धि को रोकने की है।
- शांता कुमार जैसे वरिष्ठ नेताओं की चिंता को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
- जनसंख्या नियंत्रण के लिए ठोस नीतियों और जन जागरूकता की आवश्यकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शांता कुमार ने जनसंख्या दिवस पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने कहा कि भारत हर साल जनसंख्या दिवस पर सिर्फ ढोंग करता है, जबकि जनसंख्या लगातार बढ़ रही है।
शांता कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी को कितने पत्र लिखे?
उन्होंने चार पत्र लिखे, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
1947 में भारत की जनसंख्या कितनी थी?
1947 में जनसंख्या 39 करोड़ थी, जो अब 145 करोड़ हो गई है।