प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (15 जून, 2026) को अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए हुए समझौते का स्वागत किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस समझौते के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति बहाल होगी और नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।
समझौते की पृष्ठभूमि और मुख्य बिंदु
यह समझौता 107 दिनों तक चले युद्ध को समाप्त करने के लिए हुआ है, जिसने वैश्विक ऊर्जा संकट उत्पन्न कर दिया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुसार, शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री मोदी का बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा: "मैं अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए हुई समझौते का स्वागत करता हूं, जिसने दुनिया भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान पैदा किया और कई देशों में जानें गईं। भारत को उम्मीद है कि इस समझौते के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी तथा नेविगेशन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।"
उन्होंने आगे कहा कि भारत शेष मुद्दों पर स्थायी अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए विचार-विमर्श की प्रतीक्षा कर रहा है।
भारत के लिए महत्व
यह समझौता भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया में स्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों पर पड़ता है। इस क्षेत्र में शांति से तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी और व्यापार मार्ग सुरक्षित होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
अमेरिका-ईरान समझौते पर प्रधानमंत्री मोदी की क्या प्रतिक्रिया है?
प्रधानमंत्री मोदी ने समझौते का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि इससे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल होगी तथा नेविगेशन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।
यह समझौता कब और कहाँ हस्ताक्षरित होगा?
शांति समझौते पर 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जैसा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया।
इस समझौते का वैश्विक प्रभाव क्या होगा?
यह समझौता 107 दिनों के संघर्ष को समाप्त करेगा जिसने वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा किया था। इससे क्षेत्रीय स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को लाभ होने की उम्मीद है।
Source: www.thehindu.com