प्रमुख तथ्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की रक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक व्यापार बाधित हुआ है और कई भारतीय नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है। यह टिप्पणी ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के कुछ दिनों बाद आई है।
G7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का संबोधन
पीएम मोदी ने G7 शिखर सम्मेलन के एक आउटरीच सत्र 'Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity' को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि संघर्षों का स्थायी समाधान संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही संभव है। उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत किया और कहा कि इस संघर्ष ने क्षेत्र के मित्र देशों में जान और संपत्ति का नुकसान पहुंचाया है।
पीएम मोदी ने कहा, "हम पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष ने हमारे मित्र देशों में जान और संपत्ति का नुकसान पहुंचाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से समुद्री व्यापार में व्यवधान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है।"
नाविकों की सुरक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री ने नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पर बल दिया। उन्होंने कहा, "यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें जो वैश्विक समुद्री व्यापार के माध्यम से सभी देशों को जोड़ते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।"
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में ओमान के तट पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर आक्रोश है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा था कि उसने तीन जहाजों - मारिवेक्स (8 जून), सेट्टेबेलो (9 जून) और जलवीर (11 जून) - के खिलाफ कार्रवाई की, जिन पर ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन करने का आरोप था।
वैश्विक विश्वास की कमी पर चिंता
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में विश्वास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देशों के बीच आपसी विश्वास खनिजों, प्रौद्योगिकी या बाजारों से अधिक मूल्यवान सामरिक संपत्ति बन गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि व्यापार और प्रौद्योगिकी का उपयोग संकीर्ण हितों के लिए किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास की कमी बढ़ रही है।
पीएम मोदी ने कहा, "आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी और परस्पर निर्भर है। किसी देश की ऊर्जा, खाद्य, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर निर्धारित नहीं होती। गतिशीलता, डेटा, पूंजी और प्रौद्योगिकी हम सभी को जोड़ते हैं। ऐसे समय में साझेदारियों का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। हालांकि, साझेदारियां तभी सफल होती हैं जब विश्वास उनके केंद्र में हो।"
उन्होंने कहा कि विश्वास यह होना चाहिए कि प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखलाओं का उपयोग वैश्विक भलाई के लिए किया जाएगा, न कि हथियार के रूप में; विकास के अवसर केवल कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे; और वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।
भारत की भागीदारी और G7 के बारे में
पीएम मोदी स्लोवाकिया की दो दिवसीय यात्रा के बाद G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने फ्रांस पहुंचे थे। भारत को अतिथि देश के रूप में सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था। G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। यूरोपीय संघ भी इस ब्लॉक का सदस्य है। यह मंच प्रमुख आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा और समन्वय के लिए कार्य करता है।
FAQ
G7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने क्या मुद्दे उठाए?
पीएम मोदी ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नाविकों की रक्षा और पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापार में बाधा से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।
पीएम मोदी ने भारतीय नागरिकों की मौत का जिक्र क्यों किया?
पीएम मोदी ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के संदर्भ में कहा कि संघर्ष में कई भारतीय नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है।
G7 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका क्या थी?
भारत को G7 शिखर सम्मेलन में अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया था। पीएम मोदी ने वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया।